श्रद्धा व संकल्प के साथ मनाई गई भंते सुगतानंद जी की 41वीं पुण्यतिथि

धम्म के संचरण व संरक्षण में उनके अमूल्य योगदान को किया गया याद
दीपमालाओं से रोशन किया गया बुद्ध विहार
अनिल सिंह/ बालजी दैनिक
प्रतापगढ़ । जनपद के धम्म संस्थापक यश:शेष भंते सुगतानंद जी के 41 वीं पुण्य स्मृति दिवस पर उनकी तपोस्थली सुगतानंद बुद्ध विहार रंजीतपुर चिलबिला में उनकी पावन समाधि स्थल पर भिक्षु संघ और उपासकों/उपासिकाओ द्वारा सुगतानन्द के कृतित्व व व्यक्तित्व को याद करते हुए उनके प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का बुद्धारम्भ भंते धम्मदीप,भंते अश्वजीत व भंते शांति मित्र ने बुद्ध वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील,आनापान ध्यान साधना के पश्चात भिक्खु संघ ने सत्य के मार्ग पर चलने की धम देशना दी। इस अवसर पर पूज्य भंते सुगतानन्द जी के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर बुद्ध विहार को दीपमालाओं से रोशन किया गया।
अध्यक्षता कर रहे श्री राम उमर वैश्य ने कहा कि भंते सुगतानन्द बुद्ध विहार के संस्थापक थे। उनका विचार था कि अहिंसा, शांति का विश्व में खूब प्रसार होना चाहिए इसी से विश्व शांति व मानव कल्याण होगा । मुख्य अतिथि वरिष्ट बौद्ध विचारक साहित्यकार डॉ दयाराम मौर्य “रत्न” ने कहा कि भंते सुगतानंद जी का जनपद सहित प्रयागराज, कौशांबी व सुल्तानपुर धम्म के संचरण व संरक्षण में अमूल्य योगदान रहा। पंथ, संप्रदाय की दूरियों को मिटाकर ही विश्व शान्ति की कल्पना की जा सकती है। भेदभाव भुलाकर सभी को गले लगाना मानवता की रक्षा के लिए अपरिहार्य है। संचालन कर रहे राकेश कनौजिया ने कहा कि धम्म सेवा और परोपकार का माध्यम है, धम्म सबको जोड़ता है। अतः प्रेम सद्भाव का व्यवहार आवश्यक है। भोजन दान उपासक संत प्रसाद लोहिया के नेतृत्व में किया गया।
आभार व्यक्त करते हुए अटेवा अध्यक्ष सी पी राव ने कहा कि युद्ध का विकल्प बुद्ध हैं। सम्पूर्ण विश्व बुद्ध मार्ग पर चलकर ही वसुधैव कुटुंबकम् हो सकता है।इस अवसर पर बहन लीलावती,वेद प्रकाश,दिनेश कुमार ,डा0 विजय सरोज,सी0पी0 राव, रंजू संजय,अवधेश अंजनी,राजेंद्र कुमार, आचार्य उमेश चंद्र, सुनीता,राम प्यारी,तुलसीराम कनौजिया, शेर बहादुर, ,उपस्थित थे।