आर्यावर्त ग्रामीण बैंक का उजागर हुआ भ्रष्टाचार।

सरकारी योजनाओं को बना लिया खाओ कमाओ की नीति।
रिपोर्ट धर्मेंद्र पाण्डेय
सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को भ्रष्टाचार में तब्दील करने में लगे बैंक कर्मचारी व मैनेजर सरकार चाहे जो भी सरकारी योजना लागू करती है गरीब लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए मगर उसमें अपना मोटा कमीशन फिट करने से बाज नहीं आते हैं अधिकारी ताजा मामला सीतापुर जनपद के महोली तहसील क्षेत्र के आर्यावर्त ग्रामीण बैंक नेरी का हैँ जहा नेरी आर्यावर्त ग्रामीण बैंक मे 10% कमीशन मांगते हैँ भैस बिके चाहे भैसा त्यागी को चहिये पैसा कहवात सत्यार्थ होती है जबकि सरकार की महात्वाकांक्षाी योजनाओं को धरा तल पर लागू कर आम नागरिक तक पहुंचने का काम सरकारी कर्मचारी का होता है मगर वही सरकारी कर्मचारी उसमें भ्रष्टाचार कर उनसे मोटी रकम वसूल करते हैं।
नेरी बैंक के लाभार्थी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि मैंने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर रोजगार योजना के तहत आवेदन किया था आवेदन स्वीकृत भी किया गया लेकिन शाखा प्रबंधक रोजाना दौड़ आते हैं और उनके दलाल 10% कमिशन की डिमांड भी करते हैं मगर हम अगर 10% कमीशन दे देंगे तो मेरे पास बचेगा क्या ।
अब सोचने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार हो या यूपी सरकार सभी योजनाएं लागू करती हैं धरातल पर उतारने के लिए मगर लाभार्थियों तक यह योजनाएँ पहुंचते पहुंचते भ्रष्टाचार में तब्दील हो जाती हैं कोई भी योजना हो मगर उसमे मोटा कमीशन सरकारी कर्मचारी बांध ही लेते हैं आखिर यह कब तक चलेगा।
ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारियों पर किस प्रकार से सरकार कार्यवाही करेगी या यूं ही लाभार्थी बली का बकरा बनते रहेंगे।