कितने भी सैलाब आए आसमां डूबता नहीं है माँ घर पर हो तो तुलसी का पौधा सूखता नहीं है पर…
Read More »कविता
(शैलेंद्र-विनायक फीचर्स) शीत पवन तुम धीर धरो, अब उर अग्नि को गाना है, धरती के कंपते आँगन में अब बसंत…
Read More »शिवकुमार पाण्डेय गुरूजी/ बीन्यूज हिंदी दैनिक तरबगंज. बदल गया है गांव हमारा, पहले जैसी बात कहां है कउड़े पर सुनते…
Read More »कलिकाल की छाई चहुं ओर रंगत, मानव क्यों करें तू दुष्टों की संगत, मानवता का यहां छरण हो रहा हैं,…
Read More »पता नहीं क्यों हम नकारे गए । लुटा के सब हम मारे गए। सहारा दिया अपना समझ। तभी तो अपने…
Read More »बाह्य दुनिया के छल मायावी प्रपंचों से निकल, सुन जरा थोड़ा भीतर भी मनन करता जा, सद्गुरु के अनुपम अतुलनीय…
Read More »आया बाल दिवस बन ठन के, बच्चे भोले भाले सच्चे मन के, बचपन से करें फिर मुलाकात, चाचा नेहरू…
Read More »हरी-भरी तुलसी खिली रहती मेरे आंगन मनभावन, बारहों मास बरसे सुख का अमृत”आनंद” सावन । प्रतिदिन सुबह शाम धूप, दीप,…
Read More »पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय। ढाई अक्षर प्रेम के, पढ़े सो पंडित होय॥ महापुरुषों की गूढ भाषा…
Read More »कार्तिक मास लाया त्योहारों की धूम, नर नारी सब हर्षित हुए नाचे गाए झूम, कार्तिक कृष्ण पक्ष करवा चौथ…
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