उत्तर प्रदेशसीतापुर

दैवीय आपदा प्रबंधन कार्यशाला-सुरक्षा, राहत एवं जागरूकता की अनूठी पहल

ब्यूरो रिपोर्ट अनूप पाण्डेय 
सीतापुर जनपद में दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति के अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत भूमिजा बहुउद्देश्यीय भवन, खैराबाद में विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माननीय सभापति अवनीश सिंह (सदस्य, विधान परिषद) की अध्यक्षता रही, जबकि सदस्य विधान परिषद उमेश द्विवेदी जी, अंगद सिंह , राम सूरत राजभर की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ वृक्षारोपण से हुआ, जिसमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इसके उपरांत सभी अतिथियों को बुके देकर सम्मानित किया गया और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में आपदाओं से बचाव, राहत कार्यों की रणनीति, प्राथमिक चिकित्सा एवं सरकारी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने आग, बाढ़, भूकंप, बिजली गिरने एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।
आपदा से बचाव एवं राहत के प्रमुख बिंदु
अग्नि आपदा में बचाव और अग्निशमन यंत्रों के सही उपयोग की जानकारी दी गई। चोट या कटाव की स्थिति में प्राथमिक उपचार के तौर-तरीकों को समझाया गया। कृषि एवं बागवानी फसलों के नुकसान पर सरकार द्वारा दी जाने वाली राहत योजनाओं की जानकारी साझा की गई। पशु हानि, नाविकों की नाव क्षतिग्रस्त होने, मकानों को हुए नुकसान एवं अन्य आपदा राहत योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। यातायात सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए वाहन चालकों को नियमों के पालन की अपील की गई।
समिति के सदस्यों ने नैमिषारण्य के सभी देवी-देवताओं से प्रार्थना की कि उत्तर प्रदेश में किसी भी प्रकार की दैवीय आपदा न आए, सभी नागरिक सुखी रहें और प्रदेश उन्नति की राह पर अग्रसर हो।
इस कार्यशाला में जिलाधिकारी अभिषेक आनंद, पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्र, प्रभागीय वनाधिकारी (सामाजिक वानिकी) नवीन खण्डेलवाल, मुख्य विकास अधिकारी निधि बंसल, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) नीतीश कुमार सिंह, जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यशाला में संचालन का कार्य राज शर्मा द्वारा किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों की जानकारी हर व्यक्ति तक पहुंचाना था। इस आयोजन ने लोगों को सतर्कता और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया, जिससे भविष्य में आपदा प्रबंधन की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

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