उत्तर प्रदेश

स्वास्थ्य विभाग की ख़ाउ कमाऊ की नीति से पिस रही जनता

जानकर भी अंजान बना बैठा है स्वास्थ्य विभाग

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लिए अथक प्रयास कर रहे है वही कुछ डॉक्टर उनके प्रयासों को बंटाधार कर रहे है कहीं न कही उन्हें आला अफसरों का कोई भी खौफ नजर नहीं आ रहा है बताते चले सीतापुर जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिश्रिख में लगातार बाहर की जांच डॉक्टर मनीष कुमार राय द्वारा धड़ल्ले लिखी जा रही है क्योंकि समस्त ब्लड जांचों पर 50 प्रतिशत का कमीशन इन्हें मिलता है जबकि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकार समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ब्लड व यूरिन की समस्त जांचे होने के लिए उपकरण उपलब्ध है और होती भी है मगर ख़ाऊ कमाऊ नीति की वजह से डॉक्टर बाहर की जांचे लिखते है चाहे ग़रीब जनता मरे या जिंदा रहे उससे इन पर कोई फर्क पड़ता हुआ नहीं नजर आ रहा है जब इस संबंध मे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षक डॉ प्रखर श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने जानकारी न होने का हवाला दिया है व जांच कर कार्यवाही करने का आश्वाशन दिया फिलहाल देखना यह होगा कि क्या जांच करते है और क्या कार्यवाही स्वास्थ्य विभाग के द्वारा होती है या यूंही जनता इलाज के नाम पर शिकार होती रहेगी ।

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