शाेधार्थी पाश्चात्य दृष्टि से नहीं बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा काे ध्यान में रखकर लेखन कार्य करें -कुलपति

प्रयागराज -23.11.2024
बीके यादव/ बालजी दैनिक
(एनजीबीयू में एकेडमिक लेखन विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन)
नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय, प्रयागराज में शिक्षक शिक्षा विभाग एवं समाज कार्य विभाग द्वारा एकेडमिक लेखन विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन समारोह में बताैर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कुलपति प्राे० सत्यकाम जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि शाेध में माैलिकता जरूरी हाेती है। एक शाेधार्थी काे पाश्चात्य दृष्टि से नहीं बल्कि अपनी दृष्टि से व भारतीय ज्ञान परंपरा काे ध्यान में रखकर लेखन कार्य करना चाहिए। उन्होंने एकेडमिक लेखन में भारतीय ज्ञान परंपरा काे महत्वपूर्ण बताया। कुलपति प्राे० राेहित रमेश ने अपने उद्बबाेधन में कहा कि एकेडमिक लेखन व कार्याें में माैलिकता, तकनीक और अनुशासन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जगद्गुरू राम भद्राचार्य राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट के डॉ० रजनीश पाण्डेय ने कहा कि एकेडमिक लेखन के ऐसे कार्यक्रम ज्ञानवर्धक हाेते हैं उन्होंने तकनीकी सत्र में एकेडमिक लेखन के विविध पक्षाें पर प्रकाश डाला। प्रतिकुलपति डॉ० एस०सी० तिवारी ने एकेडमिक लेखन से पूर्व गम्भीरता पूर्वक अध्ययन पर जाेर दिया। स्वागत भाषण डॉ० विधुशेखर पाण्डेय ने व विश्वविद्यालय का परिचय डॉ० आलाेक मिश्रा ने दिया। एस०एस० मिश्रा ने तीन दिवसीय कार्यशाला की उपलब्धियां प्रस्तुत की। कार्यशाला के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष शिक्षक शिक्षा डॉ देवेंद्र यादव रहे। कार्यशाला समन्वयक डॉ० पुष्पांजलि पाल, डॉ० पवन कुमार दुबे रहे। संचालन डॉ० राघवेंद्र मालवीय ने तथा धन्यवाद ज्ञापन प्राे० भावेश चंद्र दुबे ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, शाेधार्थी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में माैजूद रहे।