श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर की मुक्ति के बिना अखंड भारत की कल्पना और हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना स्वप्न के समान —-शंकराचार्य
श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए हुई विराट धर्म संसद में अनेकों प्रस्ताव पास
श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास द्वारा आयोजित
महाकुंभ नगर २३ जनवरी
बीके यादव/बालजी दैनिक
विराट धर्म संसद में भारतवर्ष को परम वैभव प्राप्त कराने श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए शंकराचार्य प्रज्ञानंद सरस्वती महाराज की अध्यक्षता में हुई इस धर्म संसद में हजारों की संख्या में दंडी संन्यासी, वैष्णव, महामंडलेश्वर एवं महंतों ने हुंकार भरी.वेद स्वस्तिवाचन से प्रारंभ हुई धर्म संसद का शुभारंभ प्रखर हिंदूवादी महामंडलेश्वर यतिनरसिंहमा नंद सरस्वती श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहरी, महंत राधाकांत गोस्वामी, जगद्गुरु अनिरुद्ध महाराज, एवं महामंडलेश्वर राधा प्रसाद देव जी महाराज ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया.
महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा कि अब समय आ गया है कि हमें एकजुट होकर सनातन विरोधियों का सामना करना होगा. भगवान योगेश्वर श्री कृष्ण की लड़ाई फिर एक बार आंदोलन के रूप में लड़नी होगी.
श्री कृष्ण जन्मभूमि के पक्षकlर हिंदूवादी दिनेश फलाहारी ने कहा कि भारतवर्ष के संत जन जब उठ खड़े होंगे भगवान योगेश्वर श्री कृष्ण का मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त होगा.
शंकराचार्य प्रज्ञानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति की बगैर हिंदू राष्ट्र एवं अखंड भारत की परि कल्पना स्वप्न के समान,
महामंडलेश्वर भैया जी महाराज ने कहा कि अब हिंदू जाग रहा है हमको विश्वास है न्यायालय जल्द से जल्द साक्ष्य के आधार पर हिन्दू हित में फैसला करेगा, फूलडोल दास महाराज जी ने कहा कि मोदी योगी की सरकार में सनातन धर्म की विजय पताका पहराई जा रही है, संत मोहिनी शरण महाराज जी ने कहा कि अब समय आ गया है कि गौ माता की रक्षा होनी चाहिए. पीठाधीश्वर बद्रीस जी महाराज ने कहा कि दिनेश शर्मा ने अन्न छोड़ दिया है, पादुका छोड़ दिए हैं, सभी संत भगवान उनको आशीर्वाद दीजिए. हजारों की संख्या में उपस्थित संत, महामंडलेश्वरों ने, श्री कृष्ण जन्मभूमि की सुनवाई जल्द करने का अनुरोध किया,
गौ माता को विश्व माता घोषित करने की मांग की,
तथा जनसंख्या नियंत्रण बिल लाने की सरकार से गुजारिश की
इस अवसर पर प्रमुख रूप से महामंडलेश्वर कृष्णानंद जी महाराज, आचार्य रमाकांत गोस्वामी, स्वामी ज्ञान सागर जी महाराज, बल्लभ गोस्वामी, राष्ट्रीय महामंत्री संगठन अश्वनी शर्मा, सृष्टि सारस्वत, सोनू शास्त्री, ठाकुर नरेश सिंह, सुखराम सिंह कमल, सीतारमण, वेद प्रकाश कटिहार, राजेश कृष्ण शास्त्री, संचालन आचार्य बद्रीश महाराज, राजेश पाठक ने किया।