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‘जगतु माहरा की भूमि’ पर बसा है जगदलपुर: माहरा समाज का आरोप- विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे में नहीं मिल रहा उचित सम्मान

बस्तर: जगदलपुर की धरती पर आज धूमधाम से विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा मनाया जाता है, जो 75 दिनों तक चलता है. लेकिन क्या आपको पता है जगदलपुर का नाम पहले जगतुगुड़ा हुआ करता था. बाद में राजा दलपत देव ने जगतू से जग और दलपत सागर के दल मिलाकर जगदलपुर को स्थापित किया. इसमें भी गौर करने वाली बात ये है कि जगतु क्या है.

जगतू माहरा की जमीन पर आज का जगदलपुर

दरअसल जगदलपुर की धरती रियासतकाल में माहरा समाज की हुआ करती थी. इस समाज का सरदार जगतु माहरा था. उस जमाने में दशहरा पर्व के दौरान राज दरबार में राजा के साथ माहरा कबीले के सरदार जगतू भी बैठा करते थे. राजा दलपत देव ने जगतु माहरा से जगदलपुर की भूमि राज पाठ करने के लिए मांगी थी, जिसे जगतू माहरा ने दी थी.

माहरा समाज का आरोप

लेकिन इन दिनों विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे में माहरा समाज ने सम्मान नहीं देने का आरोप लगाया है. समाज के लोगों का कहना रै कि प्रमुख रस्म मुरिया दरबार में समाज को जगह नहीं मिलती है. समाज के लोगों को दरकिनार किया जा रहा है. इस बात से माहरा समाज के सदस्य आक्रोशित हैं, और जिला प्रशासन से उचित मांग कर रहे हैं.

मुरिया दरबार में माहरा समाज को नहीं बुलाने का आरोप

माहरा समाज के संभागीय अध्यक्ष राजू बघेल का कहना है कि बस्तर के राजा रहे दलपत देव ने जगतु माहरा को काफी सम्मान दिया था. रियासतकाल के दशहरा पर्व और राजदरबार में राजा और जगतु माहरा साथ बैठा करते थे. जब से दशहरे पर्व का शासकीयकरण हुआ है, तब से माहरा समाज को सम्मान नहीं मिलता है. प्रमुख रस्म मुरिया दरबार में माहरा समाज का कोई स्थान नहीं है.

प्रशासन से मांग करते हैं कि मुरिया दरबार मे माहरा समाज के प्रतिनिधि को विशेष जगह दिया जाए. साथ ही प्रशासन दंतेश्वरी मंदिर के नजदीक भूमि आरक्षित करके दें. जो पूर्व से चिन्हित था, ताकि बस्तर सांसद के सहयोग से जगतु माहरा की भव्य प्रतिमा स्थापित की जा सके-राजू बघेल, संभागीय अध्यक्ष, माहरा समाज

सांसद ने दिया आश्वासन

बस्तर सांसद व दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप का कहना है कि मुरिया दरबार मे सभी समाज को सम्मान मिलना चाहिए. मुरिया दरबार में माहरा समाज का प्रतिनिधि मंडल उपस्थित हो, इसके लिए बातचीत की जाएगी. कहीं न कहीं दशहरा पर्व शासन-प्रशासन के अधीन होने के कारण पुरानी विरासत व्यवस्था में चूक हुई है. इस पुरानी परंपरा को गौरव के साथ स्थापित करने के लिए कार्य किया जाएगा.

सांसद ने कहा कि जगतू माहरा ने अपना जमीन दान में दिया है. उनके कर्ज को नहीं चुकाया जा सकता है. लेकिन उन्हें बराबर सम्मान मिलना चाहिए और उनकी प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए. इसीलिए समाज की मांग भी है और इसे स्वयं से भी सोचकर निर्णय लिया जा रहा है. सांसद निधि से प्रतिमा के लिए राशि जारी करके सहयोग किया जाएगा. और जगतु माहरा जी की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी.

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