कविता

छपास रोग के सस्ते हथकंडे, मुझे जीवन में कभी न भाये…!

​सभी शब्द अपनी नजरों में, सर्वश्रेष्ठ किसको कहें। जब भी लिखता रहा निरंतर, दिल से ही लिखते रहें ॥ ​हमेशा…

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मॉं ईश्वर का एक रूप

मॉं जब-जब हॅंसती है, बड़ी ही प्यारी लगती है, जादू भरी उसकी मुस्कान, हर गम मेरा हर लेती है ।…

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भाषा विवाद

लेखिका नूतन राय जाति और धर्म भाषा के नाम पर हम लड़े और लड़ कर बिखरते रहे। गैरो ने भाप…

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“क्या करोगे तुम”

जिसकी खातिर तुम मुझे छल कर चले गए अगर वो भी तुम्हें छल जाएगा तब क्या करोगे तुम ?? जिसकी…

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माँ

कितने भी सैलाब आए आसमां डूबता नहीं है माँ घर पर हो तो तुलसी का पौधा सूखता नहीं है पर…

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शीत पवन तुम धीर धरो

(शैलेंद्र-विनायक फीचर्स) शीत पवन तुम धीर धरो, अब उर अग्नि को गाना है, धरती के कंपते आँगन में अब बसंत…

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बदल गया है गांव

शिवकुमार पाण्डेय गुरूजी/ बीन्यूज हिंदी दैनिक तरबगंज. बदल गया है गांव हमारा, पहले जैसी बात कहां है कउड़े पर सुनते…

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मानवता का छरण हो रहा

कलिकाल की छाई चहुं ओर रंगत, मानव क्यों करें तू दुष्टों की संगत, मानवता का यहां छरण हो रहा हैं,…

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सहारे गए

पता नहीं क्यों हम नकारे गए । लुटा के सब हम मारे गए। सहारा दिया अपना समझ। तभी तो अपने…

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आरोहण कर

बाह्य दुनिया के छल मायावी प्रपंचों से निकल, सुन जरा थोड़ा भीतर भी मनन करता जा, सद्गुरु के अनुपम अतुलनीय…

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