झारखण्डराज्य

आदिवासी एकता महाजुटान पर बाबूलाल मरांडी का पलटवार, कांग्रेस पर लगाया ‘छल’ का आरोप; डेमोग्राफी को लेकर सरकार को घेरा

रांची: परिसीमन को केंद्र में रखकर कांग्रेस नेता बंधु तिर्की के संयोजन में आदिवासी एकता महाजुटान रैली हुई. इस मंच पर बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति हुई. जिस पर तंज कसते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आदिवासियों से हमेशा छल किया है और एक खास वर्ग ने उसमें सहयोगी की भूमिका निभाई है.

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आदिवासियों के हक पर डाका डालने, इन्हें बरगलाने, राज्य की लगातार बदलती डेमोग्राफी को लेकर कांग्रेस और राज्य सरकार पर भी जमकर निशाना साधा.

भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा आदिवासियों के साथ धोखा किया है. कांग्रेस द्वारा सहयोगी के रूप में आदिवासियों को बरगलाने और गुमराह करने के लिए संस्थान का उपयोग किया गया है. जिन्होंने भी आदिवासी समाज को सदैव भ्रमित किया है.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड बनने की मांग देश स्वतंत्र होने के साथ ही जोर पकड़ने लगी थी लेकिन कांग्रेस ने बड़ी राजनीतिक धूर्तता के साथ लगातार इस मांग को अनसुना और नजरअंदाज किया. नेता प्रतिपक्ष ने जयपाल सिंह मुंडा, कार्तिक उरांव और शिबू सोरेन के झारखंड आंदोलनों का विस्तार से जिक्र करते हुए कहा कि कैसे कांग्रेस झारखंड निर्माण के आंदोलनों को खरीदती और दबाती रही. कांग्रेस ने यहां के लोगों की भावनाओं की कभी कद्र नहीं किया, कांग्रेस आदिवासियों के साथ छल, धोखा करती रही है.

इस संवाददाता सम्मेलन के दौरान बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अगर शुतुरमुर्ग की तरह हम सिर छुपा कर रहेंगे तो शिकारी आएगा और मुर्गा का शिकार करके चला जाएगा. जयपाल सिंह मुंडा का जो मुर्गा छाप था, कांग्रेस उसे पहले भी शिकार कर चुकी है, कांग्रेस का वही खेल आज भी बदस्तूर जारी है. कांग्रेस का शुरू से सिद्धांत रहा है कि आदिवासी के नाम पर चिल्लाओ और उन्हें हाशिए पर धकेल दो, आज स्थिति बहुत ही खतरनाक बनी हुई है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों को यहां तक पहुंचाने में कौन जिम्मेवार रहा है, आज भी कौन जिम्मेवार है, इसके बारे में हम सबों को विचार और चर्चा करनी चाहिए.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जहां तक संविधान से प्रदत्त आदिवासियों के अधिकार की बात है तो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पूरी तरह सुरक्षित है. आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों से कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता है. नरेंद्र मोदी इन अधिकारों पर खरोंच तक नहीं आने देंगे. बाबूलाल मरांडी ने आदिवासी समाज के लोगों से कांग्रेस और ऐसे संगठनों और वर्गों की चाल में नहीं फंसने की अपील की. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस को लूटने की इजाजत नहीं दे सकती है, इसके लिए जो लड़ाई लड़नी होगी लड़ी जाएगी.

उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को रैली में शामिल होने के लिए एक धर्म गुरू की ओर से पत्र जारी किया जाता है. उन्होंने कहा कि रैली में नहीं जाने पर 100 से लेकर 500 रुपए तक जुर्माना वसूलने की धमकी दी गई. इससे संबंधित उन्होंने एक ऑडियो क्लिप भी सुनाया. कांग्रेस आदिवासियों की झूठी हितैषी और लोकतंत्र की हिमायती बनती है और यहां इसके संवाहक धार्मिक संगठन बनी हुई है. उनके इस कृत्य पर तरस और गुस्सा भी आता है. इस प्रकार का राजनीति खेल अगर ये खेलेंगे और आदिवासियों को बरगलाने का कोई काम करेगा तो यह बर्दाश्त से बाहर है.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सुनियोजित तरीके से डेमोग्राफी चेंज किया जा रहा है, इस पर ना कांग्रेस और न ही राज्य सरकार. डुगडुगी बजाकर आदिवासियों के अधिकार की लड़ाई लड़ने की बात करने वालों के द्वारा उन्हें गुमराह किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बदलती डेमोग्राफी पर कांग्रेस और हेमंत सरकार की चुप्पी घातक है.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिस प्रकार झारखंड और संथाल परगना की डेमोग्राफी चेंज हुई है, चेंज हो रही है और भविष्य में चेंज होगी, वह काफी चिंतनीय एवं भयावह है, इस दिशा में आदिवासी नहीं सोचेंगे. सरकार विचार नहीं करेगी तो जनसंख्या का आंकड़ा चीख चीख कर गवाही दे रहा है कि आदिवासियों के समक्ष महा भीषण संकट खड़ा होने वाला है. राज्य सरकार वोट बैंक की राजनीति के कारण पूरी तरह चुप है.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 1951 में आदिवासियों की आबादी 35.38 प्रतिशत थी जो 2011 में घटकर 26.20 प्रतिशत रह गई. वहीं मुस्लिम आबादी 8.9% से बढ़कर 14.53 प्रतिशत हो गई. ईसाई की आबादी में नहीं के बराबर अंतर हुआ. 1951 में सनातनियों की कुल आबादी 87.79% थी जो 2011 में घटकर 81.17% रह गई है. उन्होंने कहा कि अगर इसी रफ्तार से आदिवासियों की आबादी घटी तो 2051 आते आते आदिवासियों की आबादी 22.21% रह जाएगी. वही सनातनियों की आबादी घटकर 76.88% रह जाएगी, जबकि मुस्लिम 19% हो जाएगा.

उन्होंने संथाल परगना में आदिवासी आबादी के घटते प्रतिशत और मुस्लिम आबादी की वृद्धि का भी आंकड़ा के साथ मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि आदिवासी और दलित को संविधान में आबादी के अनुपात में अधिकार प्राप्त होता है. इसलिए इस लिहाज से यह बड़े संकट की आहट है। राज्य सरकार को इसकी कतई चिंता नहीं है.

बाबूलाल मरांडी ने आदिवासी कल्याण समिति पाकुड़ का एक पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि कैसे संताल परगना में आदिवासियों की रैयती जमीनों पर कब्जा कर उस पर बहुमंजिला भवन, कारखाना, मस्जिद, मदरसा आदि बनाए गए हैं, उन्होंने कहा कि आदिवासी कल्याण समिति की ओर से मुख्यमंत्री सहित केंद्र और अन्य स्थानों पर भेजे गए पत्र में पाकुड़ के कई इलाकों में फर्जी दान पत्र के जरिए आदिवासी जमीन पर कब्जे की बात कही गई है.

इस पत्र में कई जगहों का जिक्र करते हुए बांग्लादेशियों के द्वारा जमीन लूट की शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की गई है. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बांग्लादेशियों द्वारा कई मोहल्लों को साफ कर दिया गया है, अभी झारखंड में तो कांग्रेस और जेएमएम की सरकार है, मुख्यमंत्री को जांच करके बताना चाहिए कि मामले में क्या कार्रवाई हुई. इस दौरान प्रेस वार्ता में अशोक बड़ाइक, रामकुमार पाहन, सनी टोप्पो, पिंकी खोया भी उपस्थित रहीं.

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