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हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, एससी वर्ग के प्रतिनिधित्व को 20% तक लाने की कवायद

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने अनुसूचित जाति (एससी) कर्मचारियों के लिए पदोन्नति में आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब जिन विभागों में एससी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व 20 प्रतिशत से कम है वहां प्रमोशन में उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का कहना है कि यह कदम संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार यदि किसी प्रमोशनल कैडर में अनुसूचित जाति वर्ग का वास्तविक प्रतिनिधित्व 20 प्रतिशत से कम है तो ऐसी स्थिति में पदोन्नति कोटे के रिक्त पदों पर सबसे पहले फीडर पद पर कार्यरत पात्र अनुसूचित जाति के कर्मचारियों के नामों पर विचार किया जाएगा। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी जब तक उस कैडर में एससी वर्ग का प्रतिनिधित्व 20 प्रतिशत तक नहीं पहुंच जाता।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन विभागों या कैडर में अनुसूचित जाति वर्ग का प्रतिनिधित्व पहले से ही 20 प्रतिशत या उससे अधिक है वहां फीडर पद पर कार्यरत पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति लागू सेवा नियमों के अनुसार सामान्य प्रक्रिया के तहत ही की जाएगी। वहां कोई अतिरिक्त प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। संशोधित नियमों में यह भी पूरी तरह से साफ है कि प्रमोशनल कैडर में 20 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की गणना करते समय उन सभी कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा जो वरिष्ठता-सह-योग्यता (सीनियरटी-कम-मेरिट) के आधार पर पदोन्नत हुए हैं चाहे उन्होंने आरक्षण का लाभ लिया हो या वे अपनी मेरिट के आधार पर पदोन्नत हुए हों।

सरकार का यह फैसला प्रशासनिक संतुलन और सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे उन विभागों में एससी कर्मचारियों को बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है जहां अब तक उनका प्रतिनिधित्व कम रहा है।

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