
पंजाब में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी के तहत भाजपा-पंजाब की अकाली जत्थेबंदियों के संपर्क में है और इनके साथ गठजोड़ कर सकती है। शिरोमणि अकाली दल (बादल) को फिलहाल दूर रखा जाएगा। उधर, विभिन्न सियासी दलों के 16 बड़े नेताओं को भी जल्द भाजपा में शामिल करवाए जाने की तैयारी है।
भाजपा की यह कूटनीति आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता हासिल करने के लिए तैयार रणनीति का हिस्सा है। पंजाब में शिअद (बादल) के अलावा चार अन्य अकाली जत्थेबंदियां सक्रिय हैं। इनमें शिअद (पुनर सुरजीत), एक साल पहले ही बादल गुट से बगावत कर बनी है। इसके अलावा अकाली दल (वारिस पंजाब दे), शिअद (संयुक्त) व शिअद (अमृतसर) भी सक्रिय हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि भाजपा 117 में से 99 सीटों पर खुद को मजबूत मानती है जबकि 18 सीटें कमजोर हैं। इनमें से 73 सीटों पर भाजपा का मुख्य फोकस रहेगा।
शिअद (बादल) संग गठजोड़ की बात पर उन्होंने इशारों में कहा, पंजाब में अकाली दल खत्म नहीं होगा बल्कि असली अकाली दल उभरेगा और संभवत: उससे भाजपा का गठजोड़ होगा। उन्होंने साफ कहा कि शिअद (बादल) के अलावा अन्य अकाली जत्थेबंदियों के साथ पार्टी का संपर्क है। इतना ही नहीं विभिन्न दलों के 16 कद्दावर नेता भी जल्द भाजपा में आएंगे। 44 बाहरी नेता अभी तक भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो इस बार जट सिख चेहरे को ही सीएम बनाने पर विचार किया जाना है।
उन्होंने कहा कि भाजपा और शिअद (बादल) का गठजोड़ होने वाला है, यह नैरेटिव वही लोग गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें पार्टी का राजनीतिक अस्तित्व बचाने की चिंता है। उनके अनुसार भाजपा की टॉप लीडरशीप ने कभी नहीं कहा कि यह गठजोड़ हो सकता है। हां, पार्टी यह जरूर कहती है कि हमारे दरवाजे पंजाब की तरक्की और खुशहाली चाहने वाले हर नेता के लिए खुले हैं।
गठबंधन से पहले सियासी विरोधियों में बेचैनी
भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन अभी भले ही सिर्फ अटकलों में हैं मगर इसकी संभावनाओं ने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की बेचैनी बढ़ा दी है। रखड़ पुण्या मेले में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संभावित गठजोड़ को लेकर अकाली दल और भाजपा पर निशाना साधा। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी कह चुके हैं कि भाजपा के साथ गठबंधन नहीं होगा। यह बात दोनों दलों के नेता एक बार कसम खाकर कह दें। ऐसे में दोनों विरोधी दलों की नजरें गठबंधन की दिशा पर टिकी हैं।





