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अरावली की हरियाली लौटाने की मुहिम: हरियाणा वन विभाग की ‘मातृवन’ योजना

अरावली पर्वत शृंखला की लुप्त होती हरियाली को पुनर्जीवित करने के लिए हरियाणा वन विभाग ने एक महात्वाकांक्षी योजना मातृवन का आगाज किया है। योजना के तहत गुरुग्राम जिले के 750 एकड़ पहाड़ी क्षेत्र को सघन वन में तब्दील करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि इस पूरी योजना में सरकारी खजाने पर बोझ नहीं पड़ेगा, बल्कि निजी कंपनियां अपने सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड के जरिए इस हरित क्रांति की जिम्मेदारी उठा रही हैं।

पहले चरण में 3 गांवों में होगा पौधारोपण

वन विभाग ने अरावली के उन हिस्सों को चिन्हित किया है जहां खनन या अतिक्रमण के कारण हरियाली कम हो गई है। मातृवन योजना के पहले चरण में तीन गांवों की भूमि पर पौधरोपण किया जाएगा। गुरुग्राम के पास स्थित इस गांव की पहाड़ियों पर बड़ा हिस्सा कवर होगा।

इन गांवों में विकसित होगी हरित पट्टी

हैदरपुर विरान और वजीराबाद में इन क्षेत्रों की 750 एकड़ भूमि को हरित पट्टी के रूप में विकसित किया जाएगा। इन क्षेत्रों में सघन पौधरोपण से न केवल भू-जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि शहर को बढ़ते वायु प्रदूषण से भी राहत मिलेगी।

प्राइवेट एजेंसियों और कंपनियों ने दी सहमति

इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए छह प्रमुख निजी एजेंसियों और कंपनियों ने अपनी सहमति दे दी है। इन कंपनियों ने वन विभाग के साथ मिलकर पौधरोपण करने और अरावली के पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारने का संकल्प लिया है।

निभाएंगी दीर्घकालिक भागीदारी

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह भागीदारी एक दीर्घकालिक समझौते पर आधारित है। अक्सर देखा जाता है कि पौधरोपण के बाद रख-रखाव के अभाव में पौधे सूख जाते हैं, लेकिन मातृवन योजना में इसका विशेष समाधान निकाला गया है।

वजीराबाद क्षेत्र में फंड देगी यह कंपनी

इसमें डीएलएफ कॉर्पोरेट जगत की बड़ी हिस्सेदारी के साथ वजीराबाद क्षेत्र में तकनीकी मदद और फंड मुहैया कराएगी। इसके लिए कई संस्थाएं भी आगे आ रही हैं। क्रीडाई जो रियल एस्टेट सेक्टर की संस्था जो पर्यावरण संतुलन के लिए काम करेगी।

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