
रांचीः सहकारिता प्रभाग के माध्यम से राज्य में चल रहे कामकाज की आज मंगलवार को कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने समीक्षा की.
इस बैठक में विभाग के सचिव, विशेष सचिव, निबंधक, सहयोग समितियां तथा सभी एपेक्स सोसाइटी के प्रबंध निदेशक उपस्थित रहे. इनमें झास्कोलैम्प्स, झमकोफेड, सिद्धकोफेड, झास्कोफिश एवं झारखंड मिल्क फेडरेशन के एमडी शामिल रहे.
इस बैठक में विभाग के बजटीय प्रावधानों एवं व्यय की प्रगति, संचालित योजनाओं की स्थिति, बेहतर प्रदर्शन कर रही योजनाओं तथा चालू वित्तीय वर्ष में शुरू की गई नई योजनाओं की कार्य प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई.
कृषि एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाओं का बजट खर्च करना नहीं, बल्कि ऐसी योजनाएं जमीन पर उतारना है, जिनका सीधा और स्थायी लाभ किसानों, उत्पादकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिले. इसके लिए योजनाओं की नियमित समीक्षा और समयबद्ध क्रियान्वयन जरूरी है.
हर विधानसभा में बनेगा कोल्ड स्टोरेज-कम-मार्केटिंग सेंटर
इस समीक्षा बैठक के दौरान कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज-कम-मार्केटिंग सेंटर स्थापित करने की महत्वपूर्ण योजना ली है. इसके लिए डीपीआर तैयार कराने की प्रक्रिया चल रही है लेकिन अब तक प्राप्त डीपीआर से विभाग पूरी तरह संतुष्ट नहीं है.
उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि देशभर में बेहतर लॉजिस्टिक एवं कोल्ड-चेन सिस्टम विकसित करने वाली अग्रणी कंपनियों को भी कंसल्टेंसी के लिए आमंत्रित किया जाए. उनके तकनीकी सुझाव लिए जाएं, ताकि परियोजना को भविष्य की जरूरतों और आधुनिक तकनीक के अनुरूप तैयार किया जा सके. मंत्री ने कहा कि राज्य के लगभग 20 जिलों में 5,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज बनाए गए हैं.
उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोरेज-कम-मार्केटिंग सेंटर सरकार की एक बड़ी और दीर्घकालिक परियोजना है. जिसमें बड़ी राशि का निवेश होना है इसलिए इसकी योजना और तकनीकी संरचना ऐसी होनी चाहिए. जिसमें आधुनिक तकनीक, ऊर्जा दक्षता, बेहतर लॉजिस्टिक्स, मार्केटिंग एवं भविष्य की आवश्यकताओं को शुरुआत से ही शामिल किया जाए.
सरकारी स्कूलों के बच्चों को मिलेगा रागी का पौष्टिक आहार, किसानों को मिलेगा बाजार
बैठक में सिद्धकोफेड द्वारा प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के लिए रागी (मड़ुवा) के आटे की आपूर्ति से संबंधित प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई. फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत रांची, खूंटी और सरायकेला-खरसावां जिलों को शामिल किया गया है.
मंत्री ने कहा कि यह पहल दोहरे उद्देश्य को पूरा करेगी—एक ओर स्थानीय किसानों के उत्पाद मड़ुवा को सुनिश्चित बाजार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्कूली बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि स्थानीय कृषि उत्पादों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में इस मॉडल को आगे विस्तारित किया जा सकता है.
इस बैठक में झास्कोलैम्प्स द्वारा प्रस्तावित ‘लाह पोषक समृद्धि योजना’ पर भी विस्तार से चर्चा हुई. इस योजना के तहत लाभुकों को लाह उत्पादन के लिए उपयोगी पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे. योजना में 400 सीमियालता के पौधे, 5 कुसुम, 5 बेर तथा 20 कैलियेंड्रा/कैलोथायरस के पौधे दिए जाने का प्रावधान है. ये सभी पौधे लाह उत्पादन के लिए उपयोगी एवं पोषक वृक्ष हैं.
मंत्री ने बताया कि सीमियालता के पौधे लगभग एक वर्ष में लाह उत्पादन के योग्य हो जाते हैं. योजना के तहत लगभग 20 डिसमिल भूमि पर एकीकृत खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसान लाह उत्पादन के साथ अन्य कृषि गतिविधियों को भी जोड़कर अपनी आय के स्रोतों को मजबूत कर सकेंगे.
उन्होंने कहा कि झारखंड में लाह उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और सहकारिता के माध्यम से लाह उत्पादकों को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण एवं बाजार तक बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं में समयबद्ध क्रियान्वयन, पारदर्शिता, तकनीकी गुणवत्ता और किसानों को प्रत्यक्ष लाभ सुनिश्चित किया जाए.


