
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर को चंडीगढ़ जिला अदालत से अंतरिम राहत मिली है। उन्होंने अकाली दल के नेता बिक्रमजीत सिंह मजीठिया, कांग्रेस के विधायक सुखपाल खैरा और रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह के खिलाफ चंडीगढ़ में मानहानि का केस दायर किया है। उनकी याचिका पर अदालत ने गुरप्रीत कौर के खिलाफ कोई अपुष्ट और मानहानिकारक सामग्री इंटरनेट मीडिया या किसी अन्य माध्यम से प्रकाशित, प्रसारित या साझा करने से अगले आदेश तक रोक लगाई है।
अदालत में दायर याचिका में गुरप्रीत ने आरोप लगाया था कि प्रतिवादियों ने उन पर दुष्कर्म के आरोपित को बचाने के लिए पांच करोड़ रुपये मांगने का आरोप लगाया। यह सामग्री इंटरनेट मीडिया, समाचार प्रसारण और प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से प्रसारित की गई। याचिका के अनुसार, एक व्यक्ति को इस कथित लेनदेन में मध्यस्थ बताया गया था, लेकिन उसने इंस्टाग्राम वीडियो में किसी तरह की मुलाकात या पैसे मांगने से साफ इनकार किया।
अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त ठोस प्रमाण सामने नहीं रखे गए हैं। अदालत ने कहा कि जिन पोस्ट, वीडियो और तस्वीरों के आधार पर आरोप लगाए गए, वह फिलहाल अपुष्ट सामग्री पर आधारित दिखाई देते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित व्यक्ति के आरोपों से मुकर जाने के बाद इन पोस्ट और वीडियो का आधार प्रथम दृष्टया असत्य प्रतीत होता है।
अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा उसकी गरिमा का अभिन्न हिस्सा है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच संतुलन जरूरी है। हालांकि, अदालत ने इंटरनेट मीडिया से पोस्ट, वीडियो और तस्वीरें हटाने का आदेश फिलहाल नहीं दिया। इस संबंध में पहले प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुना जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर 2026 को होगी।



