
चंडीगढ़। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अत्याचार(SC-ST अत्याचार) के मामलों में पीड़ितों को राहत और पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार की सहायता लगातार बढ़ी है। कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद नवीन जिंदल द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने बताया कि वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 1423.30 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई और 2.67 लाख से अधिक पीड़ितों को राहत प्रदान की गई।
केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा में SC-ST अत्याचार निवारण कानून के तहत वर्ष 2024 में 1077 मामले दर्ज हुए। इनमें 661 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया गया, जबकि 56 मामलों में दोषसिद्धि हुई। साल के अंत में 3910 मामले अदालतों में लंबित थे।
केंद्रीय मंत्री के जवाब के मुताबिक, प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में नए मामलों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2022 में 1633 मामले दर्ज हुए थे और 3119 मामले लंबित थे। वर्ष 2023 में 1539 मामले दर्ज हुए और लंबित मामलों की संख्या 3569 रही। वर्ष 2024 में नए मामले घटकर 1077 रह गए, लेकिन लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 3910 हो गई।
केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि हरियाणा में अभी SC-ST अत्याचार मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए अलग एक्सक्लूसिव स्पेशल कोर्ट नहीं है। देश के 15 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 217 विशेष अदालतें स्थापित की जा चुकी हैं।
अधिनियम की धारा 14 के तहत राज्य सरकार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से ऐसी अदालत गठित कर सकती है। इससे लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।
तीन साल में 1423 करोड़ रुपये की केंद्रीय मदद
केंद्रीय मंत्री ने नवीन जिंदल के सवाल के जवाब में जानकारी दी कि पीड़ितों की राहत और पुनर्वास के लिए वर्ष 2022-23 में 392.71 करोड़, 2023-24 में 535.30 करोड़ और 2024-25 में 495.29 करोड़ रुपये जारी किए गए। इस अवधि में 2.67 लाख से अधिक पीड़ितों को राहत मिली।





