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फ्री होल्ड नीति पर अड़े विज, बोले- ‘अंबाला कैंट मेरा घर, जनता मेरा परिवार’

चंडीगढ़: हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने अंबाला कैंट को फ्री होल्ड करने के मुद्दे पर उनका इस्तीफा मांगने वालों पर पलटवार करते हुए कहा है कि अंबाला कैंट का इतिहास और यहां की जमीन से जुड़े मामलों की जानकारी न रखने वाले लोग ही बचकानी बातें कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंबाला कैंट उनका घर और यहां की जनता उनका परिवार है तथा वह अपने घर-परिवार की रक्षा और सुरक्षा करना बखूबी जानते हैं।

फ्री होल्ड नीति को लेकर चल रही बयानबाजी के बीच विज ने कहा कि उन्होंने जीवन में कभी अंबाला कैंट को फ्री होल्ड कराने की पैरवी नहीं की। इसके विपरीत, जब अधिकारियों की ओर से तैयार की गई नीति मंत्रिमंडल के सामने लाई गई तो उन्होंने उसके कई प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए और प्रस्ताव को डेफर करवाया। विज ने कहा कि वह आगे भी ऐसा कोई फैसला नहीं होने देंगे, जिससे अंबाला कैंट के लोगों को भारी आर्थिक या कानूनी नुकसान उठाना पड़े।
उन्होंने साफ किया कि फ्री होल्ड नीति उनकी बनाई हुई नहीं है, बल्कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद अधिकारियों ने इसे तैयार किया था।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बनी थी फ्री होल्ड नीति

अनिल विज ने बताया कि अंबाला कैंट में भूमि पर कब्जे से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को अंबाला छावनी के लिए स्पष्ट लैंड अथवा फ्री होल्ड पॉलिसी तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्य सचिव की ओर से अदालत में भरोसा दिलाया गया कि सरकार इस संबंध में नई नीति तैयार करेगी। इसी न्यायिक प्रक्रिया के तहत अधिकारियों ने फ्री होल्ड नीति का प्रारूप तैयार किया और इसे मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया।
विज के अनुसार, उन्होंने इस नीति का गंभीरता से अध्ययन किया। इसके लिए उन्होंने वकीलों के साथ बैठकर इसके कानूनी प्रावधानों को भी समझा। अध्ययन के दौरान उन्हें नीति में कई ऐसे प्रावधान मिले, जिन्हें वह अंबाला कैंट के आम नागरिकों के हित में नहीं मानते।यही कारण है कि उन्होंने कैबिनेट में प्रस्ताव को डेफर करवाया।

‘फ्री होल्ड कराने की मैंने कभी पैरवी नहीं की’

विज ने उन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया कि वह अंबाला कैंट को फ्री होल्ड कराने के पक्ष में रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी अंबाला कैंट को फ्री होल्ड कराने की पैरवी नहीं की।कुछ शरारती तत्व अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए ऐसे भ्रामक प्रचार में लगे हैं।उनका कहना है कि उनका विरोध फ्री होल्ड शब्द से नहीं, बल्कि उन शर्तों से है जो प्रस्तावित नीति में रखी गई हैं। यदि किसी नीति के कारण वर्षों से अपनी संपत्तियों में रह रहे परिवारों पर अचानक करोड़ों रुपये का आर्थिक बोझ पड़ता है अथवा पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके अधिकार प्रभावित होते हैं तो ऐसी व्यवस्था पर सवाल उठाना जरूरी है।

विज ने कहा कि अंबाला कैंट की कौन सी समस्या कैसे हल करवानी है, वह अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने अपने विरोधियों को संदेश देते हुए कहा कि केवल राजनीतिक बयानबाजी से अंबाला के लोगों के हितों की रक्षा नहीं की जा सकती।

डेढ़ सौ साल पुराना इतिहास, दस्तावेजों की सबसे बड़ी चुनौती*

विज ने फ्री होल्ड नीति के उस प्रावधान पर विशेष आपत्ति जताई है, जिसके तहत संपत्ति को फ्री होल्ड कराने के लिए मूल दस्तावेज जमा करने होंगे।
उनका कहना है कि अंबाला कैंट का इतिहास डेढ़ सौ साल से भी अधिक पुराना है। यहां बड़ी संख्या में परिवार पीढ़ियों से अपनी संपत्तियों में रह रहे हैं। इतने पुराने मूल दस्तावेज अधिकांश परिवारों के पास सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में यदि फ्री होल्ड के लिए मूल दस्तावेज अनिवार्य कर दिए जाते हैं तो हजारों परिवार केवल दस्तावेजों के अभाव में अपने संपत्ति अधिकारों से वंचित हो सकते हैं। विज का सवाल है कि जिस परिवार के पास दशकों से संपत्ति है, वह डेढ़ सौ साल पुराना मूल दस्तावेज कहां से लेकर आएगा? उनके अनुसार, नीति बनाते समय अंबाला कैंट की ऐतिहासिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

25 प्रतिशत रकम आवेदन के समय, बाकी एक साल में

विज ने प्रस्तावित नीति की आर्थिक शर्तों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। उनके अनुसार, फ्री होल्ड के लिए जमीन की कीमत कलेक्टर रेट के आधार पर निर्धारित की जानी है। आवेदन करते समय कुल राशि का 25 प्रतिशत भुगतान करना होगा, जबकि शेष राशि एक वर्ष के भीतर जमा करनी होगी।

विज के अनुसार, यह शर्त आम और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भारी पड़ सकती है। जिन लोगों की संपत्तियां बड़ी हैं, लेकिन उनकी आर्थिक क्षमता सीमित है, उनके सामने अचानक बड़ी रकम जुटाने की चुनौती खड़ी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि नीति का उद्देश्य यदि लोगों को उनकी संपत्ति पर स्पष्ट अधिकार देना है तो उसे आम आदमी के लिए सुविधाजनक बनाया जाना चाहिए, न कि ऐसा कि संपत्ति का मालिक ही उसे बचाने के लिए आर्थिक संकट में फंस जाए।

1000 गज जमीन पर करोड़ों रुपये का बोझ

अनिल विज ने नीति के संभावित प्रभाव को उदाहरण के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास 1000 गज जमीन है और उसका कलेक्टर रेट 60 हजार रुपये प्रति गज है तो जमीन की कीमत के आधार पर उसे करोड़ों रुपये की राशि जमा करनी पड़ सकती है।
विज का कहना है कि सामान्य परिवारों के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना आसान नहीं है। ऐसी स्थिति में संपत्ति रखने वाला व्यक्ति अपनी ही जमीन को फ्री होल्ड कराने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हो सकता है। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग पर इस नीति का सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है।

भुगतान नहीं किया तो संपत्ति सील होने का डर

विज ने प्रस्तावित नीति की उस शर्त पर भी सवाल उठाए हैं जिसके तहत निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर संपत्ति को सील कर सरकार अपने कब्जे में ले सकती है। उनके अनुसार, यदि सरकार बाद में ऐसी संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने में सक्षम होगी तो यह आम नागरिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाएगा। विज का कहना है कि किसी भी नीति में नागरिकों को राहत और सुरक्षा का प्रावधान होना चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को समय पर भुगतान न कर पाने की स्थिति में संपत्ति खोने के खतरे में डालना उचित नहीं होगा।

1977 के समझौते से जुड़ा है जमीन का पूरा विवाद

अंबाला कैंट की वर्तमान जमीन व्यवस्था को समझने के लिए विज ने वर्ष 1977 के घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 5 फरवरी 1977 तक पूरा क्षेत्र कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन था। तत्कालीन रक्षा मंत्री बंसीलाल के कार्यकाल में लगभग 1063 एकड़ जमीन को कैंटोनमेंट बोर्ड से अलग कर नगर पालिका क्षेत्र बनाया गया। उस समय हुए समझौते के तहत हरियाणा सरकार को भारत सरकार की भूमि का स्वामित्व मिलना था। इसके बदले सेना की पसंद की 150 एकड़ जमीन नि:शुल्क उपलब्ध कराई जानी थी। विज के मुताबिक, वर्ष 2000 तक किसी सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं उठाया। बाद में उनके प्रयासों से सेना को 150 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई और समझौते की शर्त पूरी की गई।

रजिस्ट्री होती रही, फिर बदली व्यवस्था

विज ने बताया कि लंबे समय तक अंबाला कैंट में लोगों की संपत्तियों की रजिस्ट्री सामान्य रूप से होती रही। बाद में रजिस्ट्री के स्वरूप में बदलाव किया गया और यह उल्लेख होने लगा कि केवल भवन या ढांचे की रजिस्ट्री होगी, जमीन की नहीं, क्योंकि जमीन का मालिकाना हक सरकार के पास है।
यहीं से संपत्ति मालिकों की परेशानी और बढ़ी। अब फ्री होल्ड नीति के जरिए जमीन का अधिकार स्पष्ट करने की कोशिश हो रही है, लेकिन विज का सवाल है कि समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे पुराने संपत्ति मालिकों के अधिकार सुरक्षित रहें।

‘अंबाला कैंट मेरा घर, जनता मेरा परिवार’

अनिल विज ने अपने अंबाला कैंट से लंबे राजनीतिक और व्यक्तिगत रिश्ते का हवाला देते हुए कहा कि अंबाला उनके लिए केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं है।
उन्होंने कहा कि अंबाला कैंट उनका घर है और यहां की जनता उनका परिवार है। इसी जनता ने उन्हें सातवीं बार विधानसभा में भेजा है। इसलिए अपने लोगों के हितों की रक्षा करना उनका कर्तव्य है। विज का कहना है कि वह अंबाला की समस्याओं को बाहर से नहीं देखते। उल्लेखनीय है कि विज खुद अंबाला में रहते हैं और प्रतिदिन चंडीगढ़ से अंबाला आते-जाते हैं।

हरियाणा में कई बार मंत्री रहने के बावजूद उन्होंने चंडीगढ़ में सरकारी कोठी नहीं ली। विधायक रहते हुए भी उन्होंने एमएलए फ्लैट नहीं लिया। वह वर्षों से सुबह जल्दी अंबाला के टी-प्वाइंट पर जाकर स्थानीय लोगों के साथ बैठते और बातचीत करते रहे हैं। उनके अनुसार, इस कारण उन्हें अंबाला की जमीनी समस्याओं और लोगों की चिंताओं की सीधी जानकारी रहती है।

सातवीं जीत से विरोधियों को दिया जवाब

विज के खिलाफ 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के भीतर से भी कुछ लोगों द्वारा उनके खिलाफ विरोध और बगावत की स्थिति बनी थी। उनके खिलाफ चुनावी माहौल बनाने के प्रयास किए गए, लेकिन इसके बावजूद वह अपनी कार्यप्रणाली और जनता से सीधे संपर्क के दम पर सातवीं बार विधायक चुने गए।विज पर अंबाला की जनता ने हर बार उन्हें अपना विश्वास जताया है।

मुख्यमंत्री से बैठक बुलाने की मांग

विज ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर विस्तृत बैठक बुलाने की मांग की है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर बैठक बुलाएं, उसमें उन्हें भी शामिल किया जाए और उन सभी अधिकारियों को बुलाया जाए जिन्होंने फ्री होल्ड नीति तैयार की है। इसके साथ ही प्रभावित लोगों और अन्य सभी संबंधित पक्षों को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।विज का कहना है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।
उनका सुझाव है कि नीति के कानूनी, प्रशासनिक, आर्थिक और सामाजिक प्रभावों का व्यापक अध्ययन किया जाए ताकि ऐसा समाधान निकले जो हाईकोर्ट के निर्देशों का भी पालन करे और अंबाला के नागरिकों के हितों की भी रक्षा करे।

जरूरत पड़ी तो कोर्ट और जनआंदोलन का रास्ता

अनिल विज ने लोगों से कहा है कि यदि उनकी आपत्तियों को सरकार स्वीकार नहीं करती तो अंबाला शहर स्तर पर एक मजबूत संघर्ष समिति बनाई जानी चाहिए। यह समिति कानूनी लड़ाई लड़ने के साथ-साथ लोगों को संगठित कर सकती है। विज ने इस लड़ाई को किसी राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं बल्कि आम नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की लड़ाई बताया। उनके अनुसार, अंबाला कैंट के लोगों के हितों की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक और कानूनी रास्ते का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

स्तीफे की मांग के बीच विज का संदेश—‘मैं पीछे हटने वाला नहीं’

अंबाला कैंट की फ्री होल्ड नीति अब राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है। एक तरफ अधिकारी हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तैयार नीति को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में हैं, तो दूसरी तरफ अनिल विज ने इसके प्रावधानों पर खुलकर आपत्ति जताई है।

इस्तीफा मांगने वालों को जवाब देते हुए विज ने अपना रुख साफ कर दिया है कि अंबाला की जनता के हितों से जुड़े मामले में वह चुप नहीं बैठेंगे। उनका कहना है कि अंबाला कैंट उनका घर और यहां के लोग उनका परिवार हैं। जिस जनता ने उन्हें सात बार विधायक बनाया, उसके संपत्ति अधिकारों और हितों की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है।

अब देखना यह होगा कि सरकार प्रस्तावित फ्री होल्ड नीति में विज की आपत्तियों पर कितना विचार करती है और हाईकोर्ट के निर्देशों के साथ-साथ अंबाला कैंट के हजारों परिवारों के हितों के बीच किस तरह संतुलन कायम किया जाता है।

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