राज्यहरियाणा

सुखबीर बादल की नायब सैनी से मुलाकात, क्या भाजपा-अकाली रिश्तों की फिर खुलेगी राह?

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में भले ही अभी समय हो, लेकिन राजनीतिक बिसात पर चालें चलनी शुरू हो गई हैं। इस बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अचानक पंजाब की राजनीति के एक अहम किरदार के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की हाल ही में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से हुई मुलाकात ने पंजाब की राजनीतिक फिजा में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं थी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों और संभावित राजनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा हुई।

सूत्रों के अनुसार करीब एक सप्ताह पहले चंडीगढ़ में हुई इस मुलाकात का समय लगभग 35 मिनट रहा। हालांकि दोनों नेताओं की ओर से इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पंजाब में भाजपा की रणनीति के अहम चेहरा हैं नायब सिंह सैनी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भाजपा नेतृत्व ने पंजाब में संगठन विस्तार और चुनावी तैयारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी हुई है। वे लगातार पंजाब के दौरे कर रहे हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं तथा प्रभावशाली सामाजिक वर्गों के लोगों से संपर्क बना रहे हैं। हाल के महीनों में भाजपा में शामिल हुए कई नेताओं के पीछे भी उनकी सक्रिय भूमिका बताई जाती है।
इसी कारण माना जा रहा है कि सुखबीर सिंह बादल ने नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक अपनी बात प्रभावी ढंग से पहुंचाने की कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में भाजपा और अकाली दल के बीच किसी प्रकार की बातचीत आगे बढ़ती है तो नायब सिंह सैनी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

भाजपा से दोबारा गठबंधन की कोशिशों में जुटे हैं सुखबीर बादल

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल भाजपा के साथ दोबारा गठबंधन की संभावनाएं तलाशने में लगातार सक्रिय हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी संपर्क साधा गया है।
संसद के सेंट्रल हॉल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों का दावा है कि सुखबीर बादल गठबंधन की संभावनाओं को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

दिल्ली में भी जारी है संपर्क अभियान

सूत्रों के अनुसार सुखबीर सिंह बादल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा तथा पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल से भी मुलाकात के प्रयास में हैं। माना जा रहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को अकाली दल के साथ दोबारा राजनीतिक तालमेल के लिए तैयार करने की दिशा में यह संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। इन बैठकों को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन्हें फिलहाल राजनीतिक सूत्रों के दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।

*भाजपा का रुख अब भी साफ, अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान*

दिलचस्प बात यह है कि भाजपा का आधिकारिक रुख फिलहाल गठबंधन के पक्ष में दिखाई नहीं देता। पार्टी के कई राष्ट्रीय नेताओं ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि भाजपा पंजाब विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ने की तैयारी कर रही है। ऐसी स्थिति में सुखबीर सिंह बादल की यह राजनीतिक सक्रियता कितनी सफल होगी, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल दोनों दलों के बीच किसी औपचारिक बातचीत की पुष्टि नहीं हुई है।

कभी सबसे मजबूत राजनीतिक साझेदार थे भाजपा और अकाली दल

भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन भारतीय राजनीति के सबसे पुराने और सफल गठबंधनों में गिना जाता रहा है। लगभग 25 वर्षों तक दोनों दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़े। पंजाब में गठबंधन सरकारें बनीं और बादल परिवार लंबे समय तक सत्ता में रहा। केंद्र सरकार में भी अकाली दल को प्रतिनिधित्व मिला और हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय मंत्री रहीं।यह गठबंधन पंजाब में कांग्रेस के मुकाबले सबसे मजबूत राजनीतिक विकल्प माना जाता था और दोनों दलों का वोट बैंक एक-दूसरे का पूरक समझा जाता था।

कृषि कानूनों ने तोड़ दिया ढाई दशक पुराना साथ

सितंबर 2020 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के रिश्तों में दरार आ गई। अकाली दल ने किसानों की भावनाओं का हवाला देते हुए इन कानूनों का विरोध किया।
17 सितंबर 2020 को हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 26 सितंबर 2020 को शिरोमणि अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अलग होने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही करीब 25 वर्ष पुराना भाजपा-अकाली गठबंधन समाप्त हो गया।

2024 में भी नहीं बन पाई सहमति

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर कई दौर की बातचीत हुई थी। लेकिन सीटों के बंटवारे और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। परिणामस्वरूप दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। इसके बावजूद समय-समय पर दोनों दलों के नेताओं के बीच राजनीतिक संपर्क और संभावित गठबंधन की अटकलें लगती रही हैं।

क्या नायब सिंह सैनी बनेंगे दोनों दलों के बीच सेतु?

राजनीतिक हलकों में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित संवाद की अहम कड़ी बन सकते हैं। पंजाब में भाजपा के विस्तार अभियान में उनकी सक्रिय भूमिका और शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को देखते हुए इस संभावना पर चर्चा तेज है।

हालांकि भाजपा ने अभी तक गठबंधन को लेकर अपना रुख नहीं बदला है और न ही अकाली दल की ओर से कोई औपचारिक घोषणा हुई है। इसलिए फिलहाल इन सभी गतिविधियों को भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं के रूप में ही देखा जा रहा है। लेकिन इतना तय है कि सुखबीर सिंह बादल और नायब सिंह सैनी की मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले महीनों में इस घटनाक्रम पर सभी दलों की नजर बनी रहेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button