रुद्राभिषेक और पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हुआ सावन भर का भव्य आयोजन…..

ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर, उतरावां में शिवभक्ति और गौसेवा का संगम…..
निगोहां। लखनऊ, निगोहां क्षेत्र के उतरावां गांव स्थित लगभग 300 वर्ष पुराने ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में पूरे सावन माह से चल रहा भव्य रुद्राभिषेक कार्यक्रम रविवार को रुद्राभिषेक और पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हो गया। यह मंदिर गौ के गोबर और मिट्टी से निर्मित है, जो अपनी प्राचीनता और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
एक दिन की तिथि हानि के कारण कार्यक्रम का समापन आज किया गया। इस अवसर पर विशेष रूप से गौ माता को भोजन कराकर राधारानी के चरणों में यह प्रार्थना की गई कि उत्तर प्रदेश में गौ माता को ‘राज माता’ का दर्जा मिले।कार्यक्रम के आयोजक जितेंद्र सिंह ने बताया कि रुद्राभिषेक का प्रारंभ 10 जुलाई से हुआ था। प्रतिदिन आचार्य शिवम द्विवेदी के निर्देशन में मुख्य यजमान शैलेन्द्र सिंह चौहान व उनकी धर्मपत्नी चित्ररेखा सिंह के साथ भक्तगण हरिनाम कीर्तन, पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक में शामिल होते थे।आचार्य शिवम द्विवेदी ने श्रद्धालुओं को रुद्राभिषेक के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि शिवलिंग पर देशी गौ माता का दूध और गंगाजल चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं। इसी कारण पूरे सावन में रुद्राभिषेक में केवल देशी गौ माता के दूध का ही प्रयोग किया गया। साथ ही, वे प्रतिदिन गौसेवा की महिमा और उसके धार्मिक, सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते थे।समापन अवसर पर आचार्य द्विवेदी ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एवं भाद्रपद मास के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण का प्राकट्य दिवस है, वहीं इसी मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधाष्टमी मनाई जाती है, जो राधारानी का प्राकट्य दिवस है। इसी तिथि को गौ माता का भी प्राकट्य दिवस माना जाता है।उन्होंने कहा, “सनातन धर्म में 16 संस्कार हैं, जिनमें से कोई भी गौ माता के बिना पूर्ण नहीं होता। अतः हमें सभी को राधारानी के चरणों में प्रार्थना करनी चाहिए कि उत्तर प्रदेश में गौ माता को ‘राज माता’ का दर्जा मिले।कार्यक्रम के अंत में भक्तगणों ने भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के साथ समापन किया, जिससे पूरा वातावरण शिव-भक्ति और गौ-सेवा की भावना से सराबोर हो उठा।





