जिलाध्यक्ष के निष्कासन के बाद अध्यक्ष पद पर चर्चाओ का दौर शुरू,तरह- तरह के लगाये जा रहे है कयास

जाति समीकरण मे प्रमोद चंचल की ओर सभी की निगाहें,जिलाध्यक्ष पद हेतु बेहतर विकल्प
अनिल कुमार द्विवेदी
बी न्यूज दैनिक
गोण्डा। प्रदेश में आगामी चुनावों के मद्देनजर जहां एक तरफ समाजवादी पार्टी निरन्तर पीडीए का समीकरण साध रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी द्वारा अति पिछड़ा समाज से सम्बंधित जिलाध्यक्ष अमर किशोर कश्यप को पार्टी द्वारा निष्कासित किए जाने के बाद नए जिलाध्यक्ष को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। यहां ज्ञातव्य है कि जिस प्रकार से अमर किशोर बमबम ने अपने निष्कासन के बाद जनपद गोण्डा के समूचे भाजपा संगठन पर आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ सवर्ण नेताओं को पिछड़ा नेतृत्व बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था, इसीलिए हमारे खिलाफ एक पक्षीय कार्यवाही की गई है, ऐसी सूरत में भाजपा नेतृत्व के लिए नया अध्यक्ष चुनना काफी चुनौती पूर्ण है। ऐसे में एक आम चर्चा यह भी है कि इस बार भाजपा का जिलाध्यक्ष अनुसूचित समाज से भी हो सकता है। अब जहां तक बात अनुसूचित समीकरण की है तो जनपद में स्थानीय स्तर पर एक विकल्प अनिल पासवान नीलू हैं तो दूसरे विकल्प के तौर पर प्रमोद आर्य चंचल भी बेहतर अध्यक्ष हो सकते हैं। हालांकि अनिल पासवान नीलू विगत ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में अच्छे खासे विवादित रहे हैं, इन पर पार्टी में अनुशासन हीनता का आरोप रहा है और आगामी छ वर्षों के लिए उनकी सदस्यता रद्द किया जा चुका था। उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए जनपद गोण्डा में अनुसूचित जाति समीकरण में प्रमोद आर्य चंचल हर प्रकार से एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। प्रमोद चंचल की एक विशेषता यह भी रही है कि वो जनपद की राजनीति में हावी और प्रभावी सांसद व केन्द्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह राजा भईया के करीबी भी हैं। चाहे जो हो जिले मे भाजपा अध्यक्ष वर्तमान परिवेश मे तय करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है जब निष्कासित अध्यक्ष ने एक वर्ग विशेष को निष्कासन मे दोषी ठहराते हुए संगठन पर एकपक्षीय कार्रवाई की बात बताते हुए बिना जांच किये कार्रवाई बताया है।





