
रांची: राजधानी के रांची विश्वविद्यालय में आज रविवार को पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (PSACWA) की ओर से “शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया. इस समारोह में शिक्षा, एआई, और रोजगार पर भी गंभीर मंथन हुआ.
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राज्य के अपर मुख्य सचिव एके सिंह ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि शिक्षक केवल एक छात्र का निर्माण नहीं करते, बल्कि वे उस नागरिक को गढ़ते हैं जो देश और राज्य की नीतियां तय करता है. कोई भी शिक्षण संस्थान केवल ईंट और पत्थर की इमारत से नहीं, बल्कि वहां के शिक्षकों और छात्रों की ऊर्जा से बनता है.
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षक किसी भी देश,राज्य और समाज का भविष्य गढ़ते हैं. पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रेन एसोसिएशन (पासवा) के सहयोग से आयोजित इस भव्य समारोह में शिक्षा जगत में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया.
मुख्य अतिथि के रूप में समारोह को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों को दिया. उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य की परंपरा अनादि काल से चली आ रही है. चाहे महर्षि वशिष्ठ हों, गुरु द्रोण हों, कबीर दास हों या फिर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, गुरुओं ने हमेशा समाज का सर्वोच्च मार्गदर्शन किया है.
उन्होंने शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर बात करते हुए कहा कि 1960-70 के दशक में दक्षिण भारत में मेडिकल और इंजीनियरिंग संस्थानों का बेहतरीन निर्माण हुआ, जिसकी वजह से आज वे राज्य विकास में अग्रणी हैं. झारखंड में भी संत जेवियर्स और बीआईटी मेसरा जैसे संस्थानों ने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लगातार काम कर रही है. आज राज्य के कुछ स्कूलों की तुलना दिल्ली के बेहतरीन स्कूलों से हो रही है, यह गर्व की बात है. गांवों में बुनियादी चुनौतियां जरूर हैं लेकिन सरकार ‘सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ के माध्यम से वहां भी उत्कृष्ट शिक्षा पहुंचा रही है.
अजय कुमार सिंह ने कहा कि समय के साथ हमें अपनी आदतें बदलनी होंगी और नई तकनीक को अपनाना होगा,उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों के लिए उत्कृष्ट शिक्षकों के लेक्चर ऑनलाइन अपलोड करने का सुझाव दिया. तकनीकी प्रगति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को अपनाना चाहिए, लेकिन यह ध्यान रहे कि एआई केवल एक साधन है, यह शिक्षक या निर्णायक नहीं बन सकता.
उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ी चुनौती ‘जेन-जी’ पीढ़ी की समस्याओं को समझना है. शिक्षकों को उनके साथ संवाद स्थापित कर उन्हें भटकने से बचाना चाहिए साथ ही, शिक्षा को समाज और उद्योग से जोड़ने की जरूरत है, ताकि हमारे छात्र नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बन सकें. विशिष्ट अतिथि डीजी रेल अनिल पालटा ने अपने स्कूली दिनों को याद करते हुए शिक्षकों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि शिक्षकों द्वारा दी गई डांट-फटकार भी छात्र की भलाई के लिए ही होती है.
इस समारोह के दौरान विभिन्न स्कूलों से आए विद्यार्थियों ने मनमोहक सांस्कृतिक और रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसने उपस्थित दर्शकों का दिल जीत लिया.

