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हरियाणा की नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 पर दिल्ली में मंथन, निवेशकों से सीधा संवाद तेज

हरियाणा की नायब सरकार नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 को लेकर पूरे आक्रामक तेवर में नजर आ रही है। राजधानी दिल्ली में बुधवार को जो कुछ हुआ, वह महज एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि निवेश को लेकर बड़े स्तर पर ‘मंथन’ था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने देशभर के उद्योगपतियों, बड़े बिजनेस ग्रुप्स और निवेशकों के साथ लगातार बैठकों का दौर चलाया, जो देर शाम तक जारी रहा। यह सिलसिला यहीं थमने वाला नहीं है।

वीरवार को भी नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में यही रफ्तार बरकरार रहेगी, जहां सरकार एक-एक सेक्टर, एक-एक निवेशक और एक-एक सुझाव पर गहराई से काम कर रही है। साफ है कि इस बार हरियाणा सरकार सिर्फ नीति बनाने नहीं, बल्कि उसे उद्योग जगत के साथ मिलकर ‘गढ़ने’ के मिशन पर है। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ़ अमित अग्रवाल, महानिदेशक इंडस्ट्रीज यश गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

नीति नहीं, ‘को-क्रिएशन’ का नया मॉडल

सरकार का यह कदम पारंपरिक ढर्रे से हटकर है। आमतौर पर नीतियां तैयार होने के बाद उद्योग जगत के सामने रखी जाती हैं, लेकिन यहां तस्वीर उलट है। सैनी सरकार नीति को अंतिम रूप देने से पहले ही उद्योगपतियों के बीच पहुंच गई है। मुख्यमंत्री सैनी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी केवल सरकारी दस्तावेज नहीं होगी, बल्कि उद्योग जगत के अनुभव और जरूरतों पर आधारित एक ‘प्रेक्टिकल ब्लूप्रिंट’ बनेगी। बैठकों में निवेशकों से सीधे पूछा जा रहा है कि उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, किन प्रक्रियाओं में सुधार की जरूरत है और सरकार से उनकी क्या अपेक्षाएं हैं।

दिल्ली में ‘मैराथन डिप्लोमेसी’

बुधवार को हरियाणा भवन में जो माहौल रहा, वह किसी निवेश सम्मेलन से कम नहीं था। सुबह से शुरू हुआ बैठकों का दौर शाम तक बिना रुके चलता रहा। अलग-अलग सेक्टर – मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और निर्यात से जुड़े उद्योगपतियों ने अपनी-अपनी प्राथमिकताएं और सुझाव सरकार के सामने रखे। मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री ने हर सुझाव को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार, कई बड़े निवेश प्रस्तावों पर भी प्रारंभिक सहमति बनी है, जो आने वाले समय में हरियाणा के औद्योगिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकते हैं।

निवेश के साथ भरोसे का निर्माण

इन बैठकों का सबसे अहम पहलू यह है कि सरकार केवल निवेश आमंत्रित नहीं कर रही, बल्कि निवेशकों के साथ भरोसे का रिश्ता भी मजबूत कर रही है। उद्योग जगत के लिए यह संकेत है कि हरियाणा सरकार उनकी समस्याओं को समझने और समाधान देने के लिए गंभीर है। सरकार का फोकस ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और बेहतर बनाने पर है। सिंगल विंडो सिस्टम को और प्रभावी बनाने, अनुमति प्रक्रियाओं को तेज करने और अनावश्यक अड़चनों को खत्म करने पर जोर दिया जा रहा है।

प्रतिस्पर्धा के दौर में हरियाणा की रणनीति

देश के कई राज्य इस समय निवेश आकर्षित करने के लिए आक्रामक नीति अपना रहे हैं। ऐसे में हरियाणा के सामने चुनौती है कि वह खुद को सबसे बेहतर विकल्प के रूप में पेश करे। नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 इसी रणनीति का हिस्सा है। सरकार न केवल टैक्स इंसेंटिव और सब्सिडी पर काम कर रही है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में भी बड़े सुधार की तैयारी है। नई नीति में सेक्टोरल अप्रोच अपनाई जाएगी, जिसमें अलग-अलग उद्योगों की जरूरतों के हिसाब से विशेष प्रावधान किए जाएंगे।

ग्लोबल नजरिया, लोकल फोकस

बैठकों में यह भी साफ हुआ कि सरकार वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए नीति तैयार कर रही है। विदेशी निवेशकों की जरूरतों, अंतरराष्ट्रीय मानकों और सप्लाई चेन की चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। साथ ही, स्थानीय उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देना भी जरूरी है, ताकि रोजगार के अधिक अवसर पैदा हो सकें।

कल भी जारी रहेगा ‘डायलॉग ड्राइव’

वीरवार को भी हरियाणा भवन में बैठकों का दौर जारी रहेगा। उम्मीद है कि और अधिक उद्योगपति और निवेशक इसमें हिस्सा लेंगे और अपने सुझाव देंगे। सरकार इस पूरे प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रही है, ताकि हर पहलू पर व्यापक चर्चा हो सके। यह भी माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस प्रक्रिया को अन्य शहरों और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक भी ले जाया जा सकता है।

फ्रंट फुट पर सरकार, बड़े बदलाव के संकेत

दिल्ली में चल रही यह ‘मैराथन मीटिंग्स’ सिर्फ एक शुरुआत है। इससे साफ है कि हरियाणा सरकार इस बार औद्योगिक विकास को लेकर फ्रंट फुट पर खेल रही है। नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 के जरिए सरकार न केवल निवेश बढ़ाने, बल्कि रोजगार सृजन, क्षेत्रीय संतुलन और आर्थिक मजबूती का बड़ा लक्ष्य साध रही है। अगर यह रणनीति जमीन पर सफल होती है, तो हरियाणा आने वाले वर्षों में देश के सबसे तेजी से उभरते औद्योगिक राज्यों में शामिल हो सकता है। दिल्ली में चल रहा ‘निवेश संवाद’ उसी बड़े बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

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