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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बुजुर्गों का सम्मान सर्वोच्च है और पेंशन नहीं काटी गई

चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में मंगलवार को बजट सत्र के तीसरे दिन पेंशन के मुद्दे पर विपक्ष और सत्तापक्ष में टकराव देखने को मिला। कालांवाली विधायक शीशपाल केहरवाला ने पेंशन काटने के आरोप लगाए। उन्होंने वेरिफिकेशन के नाम पर रोकी गई पेंशन का ब्योरा मांगा।

समाज कल्याण मंत्री कृष्ण बेदी ने लाभार्थियों के साथ-साथ वह आंकड़ा भी सदन में रखा, जिनकी पेंशन रोकी गई है।

इस मुद्दे पर जब हंगामा काफी बढ़ गया तो मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि बुजुर्ग हमारे पिता समान हैं। मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार में बुजुर्गों का सबसे अधिक सम्मान हो रहा है।

पांच लाख तक मुफ्त उपचार की सुविधा

कांग्रेस पर हमलावर हुए सैनी ने कहा कि विपक्ष ने अफवाह फैलाकर पाप किया है। किसी भी बुजुर्ग की पेंशन नहीं काटी गई। उन्होंने कहा कि मोदी और हरियाणा सरकार ने 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को पांच लाख तक मुफ्त उपचार की सुविधा प्रदान की है।

शीशपाल केहरवाला ने पूछा कि कितने लोगों की वृद्धावस्था पेंशन वेरिफाई कराने के नाम पर रोकी गई है। 2024 के बाद कितने पेंशन रोकी गई हैं। इसका क्या पैमाना है।

कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने बताया कि बुढ़ापा, विधवा दिव्यांग सहित विभिन्न कैटेगरी के एक लाख एक हजार 452 लाभार्थियों की पेंशन उनकी मृत्यु के बाद रोकी गई है। इसी तरह से जिला समाज कल्याण अधिकारियों की रिपोर्ट व शिकायतों के आधार पर 9668 लोगों की पेंशन रोकी है।

मीडिया में लोगों को करते हैं गुमराह 

बेदी ने जब सभी आंकड़े सदन में पढ़ने शुरू किए तो केहरवाला ने कहा कि इससे समय ही बर्बाद होगा। यह डेटा तो लिखित में आ चुका है। इस पर बेदी ने कहा यह बताना जरूरी है तभी तो तसल्ली बैठेगी। मीडिया में लोगों को गुमराह करते हैं। लोगों को भी पता लगना चाहिए कि सच्चाई क्या है।

इसके बाद सीएम नायब सैनी खड़े हुए। उन्होंने कहा कि मंत्री ने सही जवाब दिया है कि अगर कोई शिकायत आती है तो सरकार की जिम्मेदारी है जांच कराना। कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने सीएम को जवाब देने की कोशिश की तो स्पीकर उन्हें रोक दिया।

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