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झीरम घाटी केस के फैसले पर दीपक बैज ने उठाए सवाल, बोले- NIA की जांच शुरू से दिशाहीन

रायपुर: झीरम घाटी नक्सल हमला केस में जगदलपुर एनआईए की विशेष अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाया. अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है. कोर्ट के इस फैसले पर पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा है कि हम अदालत के फैसले का आदर करते हैं, लेकिन अदालत ने वही फैसला दिया है, जो NIA ने तथ्य अदालत के सामने रखे थे. NIA की जांच शुरू से दिशाहीन रही है.

दीपक बैज ने फैसले पर उठाए सवाल

दीपक बैज ने कहा कि NIA ने घटना की राजनीतिक षड्यंत्र के पहलुओं की जांच नहीं की है. ये 10 ऐसे लोग हैं जो नक्सली गतिविधियों में शामिल थे. क्या ऐसे लोग इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं ? इस तरह के सवाल पीसीसी चीफ दीपक बैज ने उठाए हैं.

क्या इस घटना में बड़े नक्सली शामिल नहीं थे- दीपक बैज

जिन 10 लोगों को सजा का फैसला सुनाया गया है. आरोप सिद्ध किया गया है वे तो कोई नक्सली लीडर नहीं थे. वह तो छोटे-छोटे नक्सली गतिविधियों में शामिल थे. क्या बिना बड़े नक्सली लीडर के इतना बड़ा घटना को अंजाम दिया जा सकता है ? क्या सिर्फ 10 लोग इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं ? 3000 से अधिक नक्सली सरेंडर किए हैं. इसमें से 500 से अधिक नक्सली क्या झीरम कांड में शामिल नहीं थे. या फिर वे लोग अब तक सरेंडर नहीं किए हैं. या फिर सरेंडर से बाहर हैं. इसे सरकार को स्पष्ट करना चाहिए ?

कुल मिलाकर कहीं ना कहीं NIA केंद्र सरकार के इशारे पर तत्कालीन राज्य सरकार को बचाने का काम कर रही है. तत्कालीन मंत्रियों को बचाने और अपने नेताओं को बचाने के लिए कहीं ना कहीं एनआईए ने दिशाहीन जांच की है. सिर्फ छोटे नक्सलियों को मोहरा बनाकर उसे सजा सुनाया गया है. जबकि असली और बड़े-बड़े नक्सली बड़े मोहरे सरकार के पास संरक्षण में है- दीपक बैज, पीसीसी चीफ

झीरम नक्सल हमले की जांच में षडयंत्र- दीपक बैज

इस मामले की सच्चाई आने के लिए अब एक ही रास्ता बचा हुआ है. क्योंकि सरकार लगातार इस मामले को दबाने के लिए काम करती रही है. कभी तो जांच आयोग के खिलाफ स्टे ले लो. इस केस में भाजपा के नेता प्रतिपक्ष ने स्टे ले लिया. हम SIT गठित किए. उसके खिलाफ में NIA थी और उसे रोकने के लिए कोर्ट चली गई. यह षड्यंत्र नहीं है तो और क्या है ? कई ऐसे तथ्यों को इतने सालों में कहीं ना कहीं प्रभावित करने का काम किया गया.

झीरम नक्सल हमले पर दीपक बैज ने नार्को टेस्ट की मांग की

दीपक बैज ने कहा कि अब एक ही रास्ता बचा है और वह है नार्को टेस्ट का रास्ता है. नार्को टेस्ट तत्कालीन मुख्यमंत्री का होना चाहिए. नार्को टेस्ट तत्कालीन गृह मंत्री का होना चाहिए. तत्कालीन मुख्य सचिव का होना चाहिए. तत्कालीन डीजीपी और एडीजी नक्सल ऑपरेशन इनका नार्को टेस्ट होना चाहिए. इसके साथ ही अभी जो नक्सली सरेंडर हुए हैं. उन नक्सली लीडरों का नार्को टेस्ट होना चाहिए. नार्को टेस्ट से ये सच्चाई पता लगा सके. क्योंकि जो षड्यंत्रकारी और घटना को अंजाम देने वाले दोनों आज इस जमीन पर है. अगर नार्को टेस्ट होगा तो निश्चित रूप से पर्दाफाश होगा.

हम तो आज भी कह रहे हैं. हां भूपेश बघेल जी ने कहा कि हमारे पास सबूत है. आज भी कह रहे हैं. इस बयान से ना उस समय पलटे और ना ही आज पलट रहे हैं. आज भी कह रहे हैं कि हमारे पास सबूत है, लेकिन पूछताछ कौन करेगा? ऐसे में जांच एजेंसी को पूछताछ करनी चाहिए- दीपक बैज, पीसीसी चीफ

कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी- दीपक बैज

दीपक बैज ने आगे कहा कि आज की तारीख में SIT गठित है. SIT आज भी जिंदा है. ढाई साल से 3 साल पूरे होने जा रहे हैं. अब तक जांच क्यों नहीं की गई. आज भी हमारे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से पूछताछ होनी चाहिए. तब वे सच्चाई बताएंगे. सरकार पूछना ही नहीं चाहती. निश्चित रूप से इस मामले को लेकर हम तमाम बड़े नेताओं से चर्चा करेंगे. इसके साथ ही हमारे लीगल टीम से भी इस बात को लेकर चर्चा की जाएगी. आगे जो भी रणनीति बनेगी कांग्रेस इस पर चुप नहीं बैठेगी.

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