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हरियाणा मंत्रिमंडल ने शहरी विकास शुल्कों में संशोधन को दी मंजूरी

नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी विकास से जुड़े एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के उस प्रस्ताव पर मुहर लगाई, जिसके तहत हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम, 1976 तथा हरियाणा अनुसूचित सड़कें एवं नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965 के अंतर्गत निर्धारित विभिन्न वैधानिक फीस और शुल्कों में संशोधन किया जाएगा।

इस फैसले के साथ ही दोनों नियमों से जुड़े संबंधित शेड्यूल में संशोधन का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का उद्देश्य मौजूदा फीस संरचना को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और शहरी विकास की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप तर्कसंगत, संतुलित और अद्यतन बनाना है।

किन शुल्कों में होगा संशोधन

मंजूर किए गए प्रस्ताव के अनुसार, हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम, 1976 के तहत कई प्रमुख शुल्कों में बदलाव किया जाएगा। इनमें

  • स्क्रूटनी फीस
  • लाइसेंस फीस
  • राज्य अवसंरचना विकास शुल्क (SIDC)
  • अवसंरचना संवर्धन शुल्क (IAC)
  • IAC-TOD

शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, हरियाणा अनुसूचित सड़कें एवं नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध नियम, 1965 के तहत लागू जांच शुल्क और परिवर्तन शुल्क में भी संशोधन को मंजूरी दी गई है।

वर्षों से लंबित था संशोधन

सरकार ने माना है कि इन फीस और शुल्कों में से अधिकांश में पिछले कई वर्षों से कोई संशोधन नहीं किया गया था। इस कारण शहरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पर्याप्त राजस्व जुटाने में कठिनाई आ रही थी। बढ़ती निर्माण लागत और शहरी विस्तार की जरूरतों को देखते हुए इन दरों में बदलाव आवश्यक हो गया था।

राजस्व में होगी 22–25% तक बढ़ोतरी

संशोधित दरें एक तर्कसंगत आधार पर प्रस्तावित की गई हैं, ताकि डेवलपर्स पर अनावश्यक बोझ न पड़े और सरकार को भी आवश्यक संसाधन मिल सकें। सरकार का अनुमान है कि लाइसेंस और अन्य शुल्कों में किए गए इस संशोधन से राज्य के राजस्व में 22 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी।

शहरी विकास को मिलेगी गति

कैबिनेट के इस फैसले को शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल शहरी विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन बढ़ेंगे, बल्कि नियोजित और नियंत्रित विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार का यह निर्णय शहरी विकास, राजस्व सुदृढ़ीकरण और नियमन व्यवस्था को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक अहम पहल है।

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