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हरियाणा की नौकरशाही में बड़ा बदलाव: CM सैनी के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता 34 साल की सेवा के बाद आज होंगे रिटायर

चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता करीब 34 साल की सेवाओं के बाद बुधवार को रिटायर हो जाएंगे। केंद्र सरकार ने उन्हें सेवा विस्तार नहीं दिया है। 1992 बैच के आईएएस अधिकारी अरुण गुप्ता को सेवा विस्तार देने के लिए हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भिजवाया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया है।

राज्य सरकार के पास भी सेवा विस्तार देने की पावर नहीं है। ऐसे में अरुण गुप्ता को रि-इंप्लायमेंट (पुनर्नियुक्ति) दी जा सकती है। पुनर्नियुक्ति मिलने की स्थिति में अरुण गुप्ता को मुख्यमंत्री कार्यालय में बरकरार रखा जा सकता है।

सीएम सैनी की गुडबुक के अधिकारियों में होती है गिनती

अरुण गुप्ता की गिनती मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की गुडबुक के अधिकारियों में होती है। उन्हें पुनर्नियुक्ति मिलने की स्थिति में मुख्यमंत्री का मुख्य प्रधान सचिव-टू लगाया जा सकता है। रिटायरमेंट के बाद राजेश खुल्लर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव हैं।

प्रधान सचिव के पद पर किसी नए आईएएस अधिकारी को मौका मिलने की संभावना है। अरुण गुप्ता को मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार, प्रधान ओएसडी अथवा ओएसडी की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। उन्हें सेवा का अधिकार आयोग का अध्यक्ष भी नियुक्त किया जा सकता है। टीसी गुप्ता का कार्यकाल पूरा होने के बाद यह पद खाली चल रहा है। गुप्ता के पास वित्त सचिव का भी दायित्व है।

हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष की ओर से अरुण गुप्ता की रिटायरमेंट 30 सितंबर को होने संबंधी आदेश जारी हो गए हैं। उनकी रिटायरमेंट के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय में बदलाव होना तय है।

केंद्र सरकार द्वारा एक्सटेंशन (सेवा विस्तार) की फाइल को स्वीकार नहीं किए जाने या मंजूरी नहीं देने के बाद हरियाणा सरकार अपने स्तर पर किसी भी नियम या पावर के तहत अरुण गुप्ता को आईएएस अधिकारी के रूप में सेवा विस्तार नहीं दे सकती है।

आईएएस अधिकारी अखिल भारतीय सिविल सेवा के अंतर्गत आते हैं। इनकी सेवा शर्तें और सेवानिवृत्ति अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) नियम 1958 द्वारा संचालित होती हैं।

इन नियमों के तहत किसी भी आईएएस अधिकारी को सेवा विस्तार देने का अंतिम और अनन्य अधिकार केवल केंद्र सरकार की मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के पास होता है। राज्य सरकार के पास स्वायत्त रूप से ऐसा करने की कोई कानूनी शक्ति नहीं है।

सरकार के पास यह है वैकल्पिक रास्ता

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी चाहें तो अरुण गुप्ता के अनुभव का लाभ उठाने के लिए वैकल्पिक रास्ता चुन सकते हैं। राज्य सरकार उन्हें सेवानिवृत्ति के अगले ही दिन एक अक्टूबर से अपने स्वयं के बजट और अधिकारों के तहत मुख्यमंत्री का प्रधान सलाहकार, ओएसडी, सलाहकार अथवा मुख्य प्रधान सचिव-टू नियुक्त कर सकती है।

इस तरह की नियुक्ति पूरी तरह से संविदात्मक होती है। इसमें वे राज्य सरकार के कर्मचारी या सलाहकार तो रहेंगे, लेकिन उनके पास एक सक्रिय आईएएस अधिकारी वाले अधिकार और कैडर पोस्ट नहीं रहेगी।

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