मेरा महिला दिवस मेरी माता को समर्पित : मिक्षा रंगा

दैनिक हिन्दी बालजी/सत्यम नागपल,
महिला दिवस का मेरे जीवन में अलग सा महत्व है हम पांच बहने हैं हमारा कोई भाई नहीं है पर हमारे माता-पिता ने पांच बहनों को कामयाब बनाया मेरा हर महिला दिवस मेरी माता को समर्पित है ये कहना है जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास मिक्षा रंगा का आज जो कुछ भी हूँ माता पिता के विश्वास और मेहनत का नतीजा है माता जी शिक्षित नहीं थी माता को साइन करना भी हम सभी बहनों ने सिखाया
फिर भी माता ने सभी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलवाई आज दो बहने सरकारी नौकरी से सेवानिवृत है एक प्रोफ़ेसर तैनात है एक कनाडा विदेश में है हमारे परिवार में महिला दिवस माता को समर्पित है
आज बदल रही है तस्वीर
आज की महिला सिर्फ घर संभालने वाली नहीं है, बल्कि वह समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी बराबर योगदान दे रही है. चाहे वह मां हो, बहन हो, पत्नी हो या पेशेवर महिला हर नारी अपने कार्य और साहस से एक मिसाल कायम करती है. महिला दिवस सिर्फ एक तारीख नहीं है ये महिलाओं का अपने अधिकारों के लिए किये संघर्ष को याद करने का दिन है दुनिया में महिलाओं की आधी आबादी है पर पुरे हकों के लिए संघर्ष जारी है पुरषप्रधान देश की छवि में महिलाओं स्वतंत्र पहचान के बजाय केवल घर-परिवार की धुरी, पत्नी या मां के पारंपरिक रोल तक सीमित कर दिया जाता है





