
हजारीबाग: पीएम विश्वकर्म योजना भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है. इस योजना के तहत अब ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी आत्मनिर्भर हो रही है. जब कोई महिला योजना का लाभ ले और पूरे गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर करने की कोशिश करें तो उसकी चर्चा भी खूब होती है. हजारीबाग के सुदूरवर्ती मंगुरा गांव की सुनीता देवी ने भी पीएम विश्वकर्म योजना के तहत गांव की महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही है. वे गांव की 60 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश में लगी हुई है.
2023 को शुरू हुई है योजना
17 सितंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम विश्वकर्म योजना की शुरुआत की थी. इसका मुख्य उद्देश्य देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों जैसे लोहार, सुनार, कुम्हार, बढ़ई, दर्जी आदि को आर्थिक सहायता और कौशल प्रशिक्षण देना है. इस योजना ने मंगुरा गांव की तस्वीर बदलने का काम किया है. सुनीता देवी ने अपने पति दिनेश्वर राणा के साथ मिलकर विश्वकर्मा औद्योगिक स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड बनाया है. जिसके तहत गांव की महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
महिलाएं बनाते हैं लकड़ी का सामान
इस योजना को लेकर दिनेश्वर राणा बताते हैं गांव की महिलाओं को लकड़ी का सामान बनाने का प्रशिक्षण देती है. प्रधानमंत्री विश्वकर्म योजना का लाभ मिलने से उन्हें बल मिला है. जिसके तहर तरह-तरह के लकड़ी का समान बना कर अन्य महिलाओं को बनाने के लिए प्रशिक्षण दे रही है. प्रशिक्षण पाने वाली महिलाएं बताती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहल के बाद महिलाएं कई क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रही है.
योजना की लाभुक गांव की अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही है. हजारीबाग समेत दूसरे जिले में जब मेला का आयोजन होता है तो सुनिता अपना स्टॉल लगाती है. यही नहीं दिल्ली समेत कई स्थानों से ऑर्डर भी मिलना शुरू हो चुका है. यह योजना कारीगरों और हस्तशिल्पियों के जीवनस्तर सुधारने के लिए भारत सरकार का महत्वपूर्ण योजना है. इस योजना ने इचाक के मंगुरा गांव की तस्वीर बदल दिया है. जहां की महिलाएं आत्मनिर्भर और कौशल युक्त हो रही हैं.

