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राघव शास्त्री के सानिध्य में गिरिराज कट्टा ने पूरी की मां की मनोकामना, अयोध्या में वैदिक विधि से संपन्न हुआ रामार्चा पूजन

बृजेश सेन बालजी हिन्दी दैनिक
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में आस्था और श्रद्धा का एक भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला, जब गिरिराज कट्टा अपनी माता की वर्षों पुरानी मनोकामना को पूरा करने के लिए पूरे परिवार के साथ अयोध्या धाम पहुंचे। यहां राघव शास्त्री के मार्गदर्शन एवं राम वल्लभा कुंज के महंत राम शंकर दास के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से रामार्चा पूजन, हवन एवं विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया। इस पावन अनुष्ठान में गिरिराज कट्टा मुख्य यजमान बने।

पूरे आयोजन के दौरान वैदिक ऋचाओं और मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय बना रहा। परिवार के सभी सदस्यों ने भगवान श्रीराम के चरणों में पुष्प अर्पित कर सुख, समृद्धि, आरोग्य और परिवार की मंगलकामना की। श्रद्धालुओं ने सनातन परंपरा के अनुरूप पूजा-अर्चना कर धर्म और संस्कृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

पूजन के उपरांत पत्रकारों से बातचीत करते हुए गिरिराज कट्टा ने कहा कि उनकी माता की लंबे समय से यह इच्छा थी कि अयोध्या धाम में वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विशेष पूजन कराया जाए। परिवार ने उसी संकल्प को पूरा करने के उद्देश्य से अयोध्या आने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर पूजा-अर्चना करने का सौभाग्य मिलना उनके परिवार के लिए अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय क्षण है। यहां आकर उन्हें आत्मिक शांति, संतोष और दिव्य अनुभूति प्राप्त हुई।

उन्होंने कहा कि अयोध्या का आध्यात्मिक वातावरण हर श्रद्धालु को प्रभु श्रीराम की भक्ति से जोड़ देता है। यहां संपन्न होने वाले वैदिक अनुष्ठान केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी हैं।

इस अवसर पर राघव शास्त्री ने कहा कि अयोध्या आज पूरे विश्व के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुकी है। यह केवल भगवान श्रीराम की जन्मभूमि ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, वैदिक परंपराओं और भारतीय आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विधि-विधान से किए गए धार्मिक अनुष्ठान व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं और समाज में धर्म, संस्कृति तथा नैतिक मूल्यों के प्रति विश्वास को मजबूत करते हैं।

राघव शास्त्री ने कहा कि अयोध्या में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं करता, बल्कि यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता को भी अनुभव करता है। यही कारण है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर श्रीराम की नगरी पहुंचते हैं और यहां से नई ऊर्जा तथा आत्मिक संतोष के साथ लौटते हैं।

धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति के बाद गिरिराज कट्टा एवं उनके परिवार ने श्रीरामलला के दिव्य दर्शन किए और प्रदेश तथा देश की सुख-समृद्धि, शांति, सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण की कामना की। पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपरा का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भी आध्यात्मिक भाव से अभिभूत कर दिया।

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