
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की कि प्रदेश में 558 नए वीटा बूथ खोले जाएंगे। इससे पहले 674 वीटा बूथ स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार का उद्देश्य दुग्ध उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के साथ-साथ किसानों और दुग्ध उत्पादकों की आय में वृद्धि करना है।
मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ में सहकारी फेडरेशन, डेरीफेड, वीटा, हरहित स्टोर, लेबरफेड, हाउसफेड सहित विभिन्न सहकारी संस्थाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश में सहकारी समितियों के माध्यम से प्रतिदिन 5 लाख लीटर दूध की खरीद की जा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि सहकारी फेडरेशन को घाटे से उबारने के लिए दूध के साथ-साथ आइसक्रीम और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों का उत्पादन भी बढ़ाया जाए। साथ ही रेलवे और सेना के लिए दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति के प्रयास तेज किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने मुर्राह नस्ल की भैंसों के दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) के माध्यम से महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 143 स्वयं सहायता समूह दूध बिक्री के लिए अपनी सहमति दे चुके हैं।
बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य की 800 सहकारी समितियों में से 710 का ऑनलाइन पंजीकरण पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने सभी सीएम पैक्स को बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समिति (एम-पैक्स) में बदलने के निर्देश दिए। इन समितियों के माध्यम से कॉमन सर्विस सेंटर, पशु आहार, बीज, खाद, कीटनाशक सहित 33 प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बावल में 1.50 लाख लीटर क्षमता का आधुनिक दुग्ध संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता भविष्य में बढ़ाकर 5 लाख लीटर प्रतिदिन की जाएगी। इसके अलावा अंबाला में भी 1.50 लाख लीटर क्षमता का नया दुग्ध संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में 5 से 10 हजार लीटर क्षमता वाले 21 मिल्क चिलिंग सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशनों, पर्यटन स्थलों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों और सिविल अस्पतालों में जन औषधि केंद्रों की तर्ज पर वीटा बूथ खोले जाएंगे। साथ ही प्रदेशभर में 1,400 हरहित स्टोर स्थापित करने की योजना पर भी तेजी से काम किया जाएगा। पंचायतों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के लिए 300 स्थानों की पहचान की जा चुकी है।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सहकारी चीनी मिलों के लिए भी कई निर्देश दिए। उन्होंने पिराई अवधि को 130 दिन तक बढ़ाने और चीनी रिकवरी का लक्ष्य 10 प्रतिशत करने के निर्देश दिए। गन्ने के रकबे में वृद्धि के लिए किसानों को सूक्ष्म सिंचाई अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कैथल चीनी मिल में उच्च गुणवत्ता का गुड़ तैयार करने तथा राज्य सरकार के विभागों, बोर्डों और निगमों के कार्यालयों में सहकारी चीनी मिलों में तैयार चीनी के पाउच के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरकोफेड के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को 7 प्रतिशत ब्याज दर पर 12.50 लाख रुपये तक का आवास ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। बैठक में सहकारिता मंत्री अरविंद शर्मा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।





