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2027 तक यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने का लक्ष्य: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 के अंत तक यमुना नदी में गंदे पानी की एक भी बूंद न जाए। इसके लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना चाहिए और जहाँ भी आवश्यक हो, नए औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (Industrial Wastewater Treatment Plants) और सीवेज उपचार संयंत्र (STP) लगाए जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित एक बैठक के दौरान यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यमुना में बहने वाले पानी को साफ करने के लिए यमुना जलग्रहण क्षेत्र में 1543 MLD क्षमता वाले 91 STP संचालित किए जा रहे हैं। आवश्यकतानुसार, 11 नए STP तैयार किए जा रहे हैं, जिससे जल शोधन क्षमता में वृद्धि होगी।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जे. गणेशन ने बैठक में बताया कि कुछ औद्योगिक इकाइयाँ लागत बचाने के लिए औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र नहीं चला रही हैं और दूषित पानी छोड़ रही हैं; वहीं, कई स्थानों पर औद्योगिक इकाइयों द्वारा टैंकरों के माध्यम से दूषित कचरा गाँव के तालाबों में छोड़ने के मामले भी सामने आए हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक उद्योग अपने यहाँ उत्पन्न अपशिष्ट जल को उपचारित करने के बाद ही नालियों में छोड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना में गिरने वाली सभी 11 प्रमुख नालियों पर सीवेज उपचार संयंत्र स्थापित किए जाने चाहिए, ताकि उद्योगों से निकलने वाले सीवेज की हर बूंद यमुना नदी में उपचारित होने के बाद ही जाए। इसके लिए आवश्यकतानुसार CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) की राशि भी खर्च की जा सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना जलग्रहण क्षेत्र में 147.5 MLD क्षमता वाले 8 नए CETP (सामान्य अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र) स्थापित किए जाएंगे। इनमें से, प्रतापगढ़, मिर्ज़ापुर और फरीदाबाद के बादशाहपुर में; गुरुग्राम के सेक्टर 18, सेक्टर 34 और सेक्टर 37 में; और यमुनानगर के परवालू में 19.5 MLD क्षमता वाले एक प्लांट का निर्माण कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल शुद्धिकरण संयंत्रों के लिए भूमि अधिग्रहण और अन्य निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

बैठक में, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली की कुछ नालियों के माध्यम से हरियाणा में 211 MLD अनुपचारित (untreated) पानी आता है, जिसे हरियाणा द्वारा उपचारित करके वापस दिल्ली भेज दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले को सुलझाने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री के साथ एक बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि दिल्ली द्वारा यमुना नदी में केवल उपचारित पानी ही छोड़ा जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल, श्री अनुराग अग्रवाल, श्री विजेंद्र कुमार, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री जे. गणेशन और सदस्य श्री योगेश कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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