मुख्यमंत्री योगी का ‘विकसित कृषि-विकसित यूपी’ पर जोर: 2047 तक कृषि को खुशहाली का माध्यम बनाने का लक्ष्य

‘विकसित कृषि-विकसित यूपी’ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज रायबरेली रोड स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में ‘विकसित कृषि-विकसित उप्र@ 2047’ विषयक संगोष्ठी का उद्घाटन किया। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के 36वें स्थापना दिवस समारोह में भाग लेते हुए, मुख्यमंत्री ने एक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न पुस्तिकाओं व न्यूज़ लेटर का विमोचन भी किया। राष्ट्रीय संगोष्ठी में अपने विचार साझा करते हुए, उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों, युवा प्रतिभाओं और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सम्मानित किया।
‘विकसित कृषि-विकसित यूपी’, यूपी में सर्वाधिक रोजगार का क्षेत्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि आज भी उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाला क्षेत्र है, जिस पर लगभग तीन करोड़ किसान निर्भर हैं। इसके बाद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र आता है, जो 1.65 करोड़ लोगों को रोजगार देता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि को पलायन का नहीं, बल्कि खुशहाली का माध्यम बनाना चाहिए। यह तभी संभव होगा जब कृषि क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधानों का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि उत्तर प्रदेश विकसित होता है, तो भारत को विकसित होने से कोई नहीं रोक सकता, ‘विकसित कृषि-विकसित यूपी’
विकसित भारत @ 2047 और यूपी की भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए, मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने में राज्यों को भी अपनी भूमिका निभानी है। उन्होंने विकसित उत्तर प्रदेश बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और सभी क्षेत्रों में संभावनाओं को तलाशने पर जोर दिया। केंद्र सरकार के भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप, उत्तर प्रदेश सरकार ने 2029 तक राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है।
यूपी की कृषि क्षमता: संभावनाएं और चुनौतियां
मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि और कृषि अनुसंधान की दृष्टि से उत्तर प्रदेश प्रकृति और परमात्मा की कृपा वाला प्रदेश है। राज्य के पास विशाल और उर्वरा कृषि भूमि और पर्याप्त जल संसाधन हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश दुनिया का एकमात्र ऐसा राज्य होगा, जिसका 86 प्रतिशत से अधिक भूभाग सिंचित है।
यूपी में केंद्र और राज्य सरकार के कृषि विश्वविद्यालयों का एक मजबूत नेटवर्क है। राज्य सरकार चार कृषि विश्वविद्यालय चला रही है और पांचवां स्थापित किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा भी प्रदेश में पहले से ही कृषि विश्वविद्यालय संचालित हैं, और कृषि अनुसंधान के लिए 15 से अधिक संस्थान कार्यरत हैं। इसके अलावा, 89 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को अपनी विशेषज्ञता का लाभ प्रदान करते हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री ने चौंकाने वाले तथ्य प्रस्तुत किए कि प्रदेश के बमुश्किल 25 से 30 प्रतिशत किसान ही वैज्ञानिक शोध और अनुसंधान के कार्यों को प्रभावी ढंग से अपनी खेती में लागू कर पा रहे हैं।
उत्पादन क्षमता और भविष्य का विजन
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश की आबादी का 16 प्रतिशत हिस्सा यूपी में निवास करता है, जबकि देश की कुल कृषि योग्य भूमि का केवल 11 प्रतिशत ही यूपी में है। इस भूमि पर देश का 20 प्रतिशत से अधिक खाद्यान्न उत्पादन हो रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यूपी की भूमि की उर्वरता और जल संसाधनों को देखते हुए इससे तीन गुना अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि ‘विकसित कृषि-विकसित यूपी’ उत्तर प्रदेश में न केवल देश, बल्कि दुनिया का पेट भरने का भी सामर्थ्य है।
उन्होंने 2047 के लिए विजन 2047 की व्यापक कार्ययोजना पर प्रकाश डाला, जिसमें कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, उद्योग और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में राज्य की स्थिति का आकलन किया गया है। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों से इस दिशा में प्रयास शुरू करने का आह्वान किया।
इजराइल मॉडल से प्रेरणा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां
मुख्यमंत्री ने इजराइल की मदद से स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का भी उल्लेख किया, जिन्होंने तकनीक के क्षेत्र में सहयोग किया। उन्होंने सवाल किया कि अगर इजराइल यह कार्य कर सकता है तो हमारे कृषि विश्वविद्यालय क्यों नहीं कर सकते, और कब तक किसानों को खेतीबाड़ी से पलायन करने के लिए मजबूर होते देखते रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों पर भी चिंता व्यक्त की, यह देखते हुए कि भारी बारिश के अपेक्षित समय में प्रदेश के लगभग 15-16 जिलों में औसत से कम बारिश हुई है।
इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, प्रमुख सचिव रविंद्र, उप्र कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह, अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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