सरकार नहीं दे रही धान बोरों के उठान पर ध्यान, किसानों को हो रही भारी दिक्कत

ब्यूरो रिपोर्ट अनूप पाण्डेय
सीतापुर। उत्तर प्रदेश में इस वर्ष धान खरीद प्रक्रिया कुछ जिलों में 1 अक्टूबर 2025 से तथा शेष जिलों में 1 नवंबर 2025 से प्रारंभ की गई है, लेकिन बोरों के उठान में लापरवाही के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय सिख संगठन के जिला अध्यक्ष गुरपाल सिंह ने बताया कि धान खरीद शुरू होने के बावजूद क्रय केंद्रों पर बोरों का उठान समय से नहीं हो रहा, जिससे किसानों की उपज सरकारी दर (एमएसपी) पर बिक नहीं पा रही है। उन्होंने कहा कि कई जिलों में अधिकारी और कर्मचारी केवल औपचारिक बधाई पत्र तक सीमित हैं, जबकि धरातल पर किसानों की कोई सुध नहीं ली जा रही।
गुरपाल सिंह ने कहा कि किसानों के पास धान रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहीं चीनी मिलों में पिराई शुरू होने से स्थिति और जटिल हो गई है। “किसान के पास अक्सर एक ही ट्रैक्टर-ट्रॉली होती है — या तो वह गन्ना लेकर जाए या धान को क्रय केंद्र पर लाइन में लगाकर खड़ा करे। सरकार की नीतियां किसानों को दोराहे पर खड़ा कर रही हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ धान खरीद केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर फसल की तौल ही नहीं हो पा रही। केंद्रों का सिस्टम केवल कागजों में लक्ष्य पूर्ण करने का फर्जीवाड़ा कर रहा है।
जिला अध्यक्ष ने भारत सरकार से मांग की है कि धान क्रय केंद्रों पर तत्काल बोरों के उठान की व्यवस्था कराई जाए ताकि किसान अपनी फसल को उचित मूल्य पर बेच सकें और प्रदेश में किसानों का विश्वास शासन पर कायम रहे।




