धान की सीधी बुवाई पर कृषि विज्ञान केन्द्र कटिया में भव्य प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन

डीएसआर तकनीक से खेती में क्रांति — वैज्ञानिकों ने बताया वैज्ञानिक प्रबंधन का तरीका
किसानों ने साझा किए अनुभव — विशेषज्ञों ने दी उन्नत तकनीकों की सीख
ब्यूरो रिपोर्ट अनूप पाण्डेय
सीतापुर, धान की सीधी बुवाई (DSR) तकनीक को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र कटिया, सीतापुर द्वारा एक दिवसीय प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना व परिषद गीत के साथ हुआ। इसके पश्चात सभी अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र प्रदान कर किया गया। परिसर में किसानों का उत्साह सीधी बिजाई तकनीक को लेकर दिखाई दिया। कृषि यंत्रों, बीज पैकेटों, प्रदर्शन प्लॉटों और तकनीकी पोस्टरों की प्रदर्शनी ने आयोजन को शिक्षाप्रद बना दिया।
डॉ. दया एस. श्रीवास्तव, अध्यक्षता करते हुए कहा कि “कृषि अब केवल परंपरा नहीं बल्कि विज्ञान बन चुकी है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से खेत तैयार करें, फसल का पोषण संतुलित रखें और खरपतवार नियंत्रण करें तो उपज में 20–25% की वृद्धि निश्चित है।” उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम किसानों के बीच जागरूकता फैलाने का सर्वोत्तम माध्यम हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. शिशिर कांत सिंह, शस्य वैज्ञानिक, ने कहा कि धान की सीधी बुवाई (DSR) तकनीक आज की जलवायु परिस्थितियों में कृषि का भविष्य है। उन्होंने बताया कि धान की सीधी बुवाई से खेत की तैयारी में समय और लागत दोनों की बचत होती है।
उन्होंने कहा कि यह तकनीक लेजर लैंड लेवलर, रोटावेटर और सीड ड्रिल मशीन के माध्यम से खेत को समतल कर सीधा बीज डालने की पद्धति है। इसमें 20–25% तक सिंचाई जल की बचत और लगभग 25–30% तक मजदूरी में कमी आती है। उन्होंने किसानों को सावधान करते हुए कहा कि “डीएसआर में सफल परिणाम के लिए खेत की समतलता, उचित नमी और खरपतवार नियंत्रण अति आवश्यक है। यदि शुरुआती 30 दिनों में खरपतवार नियंत्रण किया जाए तो यह तकनीक अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है।”
उन्होंने जोर दिया कि भविष्य में जल संकट और श्रम उपलब्धता की चुनौतियों को देखते हुए डीएसआर खेती ही किसानों के लिए व्यवहारिक विकल्प बनेगी।
डॉ. आनन्द सिंह, पशु वैज्ञानिक, ने किसानों को एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पशुपालन और कृषि को जोड़ने से खेत की उर्वरता बढ़ती है और जैविक खाद की उपलब्धता सुनिश्चित होती है।
उन्होंने बताया कि “डीएसआर खेतों में अवशेष प्रबंधन अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उसका जैविक अपघटन कर खेत में मिलाना चाहिए जिससे मिट्टी की संरचना सुधरती है और अगली फसल की उत्पादकता बढ़ती है।”
, मुख्य अतिथि एवं प्रायोजक कंपनी के हेड – रिसर्च एंड डव्लपमेंट डा सुमन्त होला ने किसानों से कहा कि किसान क्राफ्ट कंपनी सदैव किसानों के साथ खड़ी है और उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले बीज, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि “हमारा लक्ष्य केवल बीज बेचना नहीं, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। सीधी बुवाई तकनीक किसानों की लागत घटाकर उन्हें प्रतिस्पर्धी बना सकती है।”
पी डी मैनेजर किसान क्राफ्ट डा. किसन जीत सिंहा ने कंपनी के बारे में किसानों को बताते हुए कहा की आईएसओ प्रमाणित माता उच्च गुणवत्ता वाले किसी उपकरणों के थोक आया तक और वितरक किसान क्रॉफ्ट ने कृषि विज्ञान केंद्र सीतापुर में किसानों के लिए सुख सीधी बुवाई पर प्रदर्शन आयोजित किया है और बताया कि सूखे सीधे धान वाले बीज का उपयोग किस्म की तुलना में स्वाद में कोई बदलाव किए बिना इसको सीधा बोया जा सकता है जिसके परिणाम स्वरूप धान की खेती की लाभप्रदता में वृद्धि होती है क्योंकि इससे खेती के खर्चे में काफी कमी आती है.
कार्यक्रम के संयोजक एवं नोडल डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह, प्रक्षेत्र प्रबंधक एवं कृषि वैज्ञानिक, ने बताया कि यह आयोजन किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने और खेत से खेत तक वैज्ञानिक खेती के संदेश को पहुँचाने का एक प्रयास है…! डीएसआर फसल में खरपतवार प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि बुवाई के तुरंत बाद प्री-इमर्जेंस हर्बीसाइड जैसे ब्यूटाक्लोर या पेंडिमेथालिन का प्रयोग करें, और 20–25 दिन बाद पोस्ट-इमर्जेंस हर्बीसाइड का प्रयोग आवश्यक रूप से करें।
उन्होंने कहा कि “यदि किसान फसल की प्रारंभिक अवस्था में खरपतवार नियंत्रण सही तरीके से करें तो उपज में 15–20% तक वृद्धि संभव है।”
इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 82 प्रगतिशील किसान, 7 बीज विक्रेता, तथा कृषि विभाग सीतापुर के 4 अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम मे किसानों के बीच प्रश्नोत्तरी कराई गई तथा किसानों को पुरस्कृत भी किया गया कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रबंधक डेब्लपमेंट ने किया।





