इंडस्ट्री और शिक्षण संस्थान का आपस में हो समन्वय – प्रो. एम जगदीश कुमार

नई शिक्षा नीति मिसमैच को खत्म कर रही है – प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव
नई शिक्षा नीति के सभी कंपोनेंट को अपनाए विश्वविद्यालय – डॉ. निर्मलजीत सिंह कलसी
स्थानीय स्तर पर उद्योगों को करें सपोर्ट – कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह
बलराम मौर्य/ बालजी हिन्दी दैनिक
अयोध्या। डॉ राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में आज 4 जुलाई को यूजीसी द्वारा प्रायोजित विकास 2025 का आयोजन डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय एवं आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज के संयुक्त तत्वधान में एक दिवसीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन स्वामी विवेकानंद सभागार में किया गया।
कॉन्फ्रेंस में उद्घाटन की अध्यक्षता यूजीसी के पूर्व चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा को नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत जोड़ा गया है। इसमें शिक्षा के साथ कौशल प्रशिक्षण एवं उद्यम को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता है। शिक्षा सिर्फ डिग्री प्राप्त करने के लिए ही न रह जाए इसके लिए इंडस्ट्री और शिक्षण संस्थानों को आपस में समन्वय स्थापित कर कार्य करना होगा। तकनीकी प्रशिक्षण और कुशलता प्रशिक्षण संस्थानों को विशेष ध्यान देना होगा। नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के तहत शिक्षण संस्थानों को 50 प्रतिशत प्रैक्टिकल से छात्रों को जोड़ना होगा। स्वागत उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षण संस्थानों और इंडस्ट्रीज के बीच हुए रिक्त स्थान को भरने की दिशा में उठाया गया कदम है। स्थानीय स्तर पर उद्योगों को सपोर्ट करना होगा। इससे रोजगार सृजन में आसानी होगी। कुलपति ने कहा कि शिक्षा कौशल विकास एवं नवाचार को अपनाना होगा तभी शिक्षा और रोजगार की मांग को पूरा किया जा सकेगा। रोजगार सृजन के क्षेत्र में युवाओं को अपने माइंड सेटअप में परिवर्तन करना होगा। नौकरियां ढूंढने के बजाय अपनी क्षमता के अनुरूप स्वयं रोजगार सृजन करने की दिशा में कार्य करें। वर्तमान समय की मांग भी यही है। शैक्षिक विमर्श सत्र में यूजीसी के वाइस चेयरमैन प्रो. दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग कोई भी गाइडलाइन स्वयं के स्तर पर नहीं तैयार करता । वह केंद्र और राज्य विश्वविद्यालय के साथ-साथ डीम्ड विश्वविद्यालय एवं प्रमुख संस्थाओं की सलाह के साथ मिलकर नीतियां तय करता है। शिक्षा की नीति में सुझाव के आधार पर ही परिवर्तन किया जाता है । वर्तमान में नई शिक्षा नीति पर बड़े स्तर पर सुझाव मांगे गए थे। वर्तमान परिवेश में बड़े स्तर पर रोजगार पैदा करने की आवश्यकता है। इसके लिए संस्थाओं एवं विश्वविद्यालय को अपने अलमुनाई से कनेक्ट करने की व्यवस्था करनी है। यह रोजगार सृजन के क्षेत्र में बड़ी सहायता होगी। आयाम बदल रहे हैं युवा की पसंद भी बदल रही है। अगर आप मूव करते रहेंगे तो आप उपलब्धियां भी हासिल करेंगे। नई शिक्षा नीति मिसमैच को दूर कर रही है। हर दशक में मैचिंग बदल रही है विश्वविद्यालयो को इसे एक स्तर पर लाना है।
शैक्षिक विमर्श सत्र में एनसीवीटी के अध्यक्ष पूर्व आईएएस प्रो. निर्मलजीत सिंह कलसी में कहा कि वर्तमान प्रवेश में देश में 25 करोड़ बच्चे स्कूल में हैं। परंतु सिर्फ चार करोड़ बच्चे उच्च शिक्षा में जाते हैं। उनमें भी ज्यादातर अकुशल ही रह जाते हैं। भारत सरकार का विजन है कि सभी के साथ जुड़कर चलना है वर्तमान में 507 निजी विश्वविद्यालय 492 राज्य विश्वविद्यालय है। इसके साथ अन्य संस्थान भी जुड़े हमें नीति के स्तर पर बदलाव करना है। नई शिक्षा नीति के 16 कंपोनेंट है उन्हें हमें प्रत्येक के स्तर पर अपनाना है। तभी हम शिक्षा और इंडस्ट्री दोनों की मांग को पूरा कर पाने में सक्षम होंगे। उद्घाटन सत्र में अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्रम भेंट कर गया। सत्र का संचालन प्रो नीलम पाठक ने किया। उद्घाटन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन कॉन्फ्रेंस विकास 2025 के संयोजक प्रो. एसएस मिश्र ने किया। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल, स्ट्रैटेजिक सलाहकार श्रीयोगी श्रीराम, प्रो विमल राह ने शैक्षिक सत्र को संबोधित किया। संयुक्त सचिव प्रो. अविरल कपूर, यूजीसी अवर सचिव वीना मेनन, डॉ राधिका, विश्वविद्यालय के कुल सचिव विनय कुमार सिंह, वित्त अधिकारी पूर्णेन्द्र शुक्ला, प्रो हिमांशु शेखर, प्रो सी के मिश्र, प्रो अनूप कुमार, प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा, डॉ विनोद चौधरी शाहिद बड़ी संख्या में प्रतिभागी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।





