कविता

“क्या करोगे तुम”

जिसकी खातिर तुम
मुझे छल कर चले गए
अगर वो भी तुम्हें छल जाएगा
तब क्या करोगे तुम ??

जिसकी खातिर तुमने
हरपल मुझ से झूठ बोला
अगर वो भी तुमसे झूठ बोले
तब क्या करोगे तुम ? ?

जिसकी झूठी सहानुभूति की खातिर
तुमने मेरे सहानुभूति को ठुकराया
अगर उसने भी तुम्हें ठुकरा दिया
तब क्या करोगे तुम ??

जिसके झूठे प्यार की खातिर
तुमने मेरे प्यार को ठुकरा दिया
अगर वो भी तुम्हें ठुकरा दे
तब क्या करोगे तुम ??

जिसका दिल रखने की खातिर
तुमने मेरा दिल तोड़ दिया
अगर वो भी तुम्हारा दिल तोड़ दे
तब क्या करोगे तुम ??

जिसकी खुशियों की खातिर
तुमने मेरी खुशियां छीन ली
अगर वो भी तेरी खुशियां छिन ले
तब क्या करोगे तुम ??

जिसके सपनों की खातिर
तुमने मेरे सपने को तोड़ दिया
अगर उसने भी तेरे सपने तोड़े
तब क्या करोगे तुम ??

जिसकी हंसी की खातिर तुमने
मेरी मुस्कान छीन ली
अगर उसने भी तेरी हंसी छीन ली
तब क्या करोगे तुम ??

जिसकी खातिर तुमने
मुझे छोड़ दिया
अगर उसने भी तुम्हें छोड़ दिया
तब क्या करोगे तुम ??

एक बार सोचना जरूर कि
पत्थर जमा करते- करते
तुमने वेशकीमती हीरे को
आखिर! क्यूं और कैसे खो दिया ।

डॉo संजुला सिंह “संजू”
जमशेदपुर (झारखंड )

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