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उत्तराखंड में कारगिल विजय दिवस: CM धामी ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि, सैनिकों के कल्याण के लिए कई घोषणाएं

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देहरादून के गांधी पार्क स्थित शहीद स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित कर कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कारगिल शहीदों के परिवारजनों को सम्मानित कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

सैनिकों और पूर्व सैनिकों के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने सैनिकों और पूर्व सैनिकों के कल्याण हेतु कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

  • चमोली जिले के कालेश्वर में ई.सी.एच.एस (पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) केंद्र और एक सैनिक विश्राम गृह का निर्माण किया जाएगा।
  • नैनीताल में भी एक सैनिक विश्राम गृह बनाया जाएगा।
  • उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के माध्यम से पूर्व सैनिकों को विदेश में रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे, जिसमें 50% सिविलियन भी शामिल होंगे।
  • मुख्यमंत्री ने बताया कि उपनल के माध्यम से राज्य के 22,500 लोगों को रोजगार मिल रहा है, और उनकी विनियमितीकरण (नियमितीकरण) की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

राष्ट्र और सेना का गौरव: कारगिल शहीदों को नमन

मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर जवानों को देश हमेशा याद रखेगा। उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय जवानों के अदम्य साहस, उत्कृष्ट रणनीति और अद्वितीय पराक्रम को याद किया, जिसने दुश्मनों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। मुख्यमंत्री ने भावुक होकर बताया कि कारगिल युद्ध में वीरभूमि उत्तराखंड के 75 जवान शहीद हुए थे।

सशक्त सेना और नया भारत PM मोदी के नेतृत्व में

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के जवानों का मनोबल बढ़ाने के साथ ही सेना को अत्याधुनिक तकनीकों और हथियारों से लैस किया जा रहा है। उन्होंने हाल ही में संपन्न ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से भारतीय सेना ने मात्र चार दिनों में पाकिस्तान को घुटनों के बल ला दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से दुश्मनों को यह साफ संदेश दिया गया है कि “भारत की बहन-बेटियों के सिंदूर उजाड़ने वालों का नामो निशान मिटा दिए जाते हैं।” उन्होंने दृढ़ता से कहा कि “हमारी सेना दुश्मन की गोली का जवाब गोलों से देती है।” यह नया भारत है, जो दुश्मनों की हर नापाक हरकत का करारा जवाब देता है।

सैनिकों के कल्याण हेतु राज्य सरकार के प्रयास

मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा सैनिकों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला:

  • प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वन रैंक-वन पेंशन योजना, नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण, रक्षा बजट में वृद्धि और बॉर्डर पर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किए जाने जैसे कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।
  • राज्य सरकार ने शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया है।
  • परमवीर चक्र से लेकर मेंशन इन डिस्पैच तक सभी वीरता पुरस्कारों से अलंकृत सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त तथा वार्षिक धनराशि में भी वृद्धि की गई है। परमवीर चक्र विजेताओं की अनुग्रह राशि 50 लाख से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये की गई है।
  • शहीदों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित किया जा रहा है, और इसके लिए आवेदन करने की अवधि को भी 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
  • राज्य में वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों के लिए परिवहन निगम की बसों में यात्रा की निःशुल्क व्यवस्था की गई है।
  • सेवारत व पूर्व सैनिकों हेतु 25 लाख रुपये तक की संपत्ति की खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है।

मंत्री गणेश जोशी का संबोधन

सैनिक कल्याण मंत्री  गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सेनाएं बहुत मजबूत हुई हैं। उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध में सैकड़ों जवान शहीद हुए, जिनमें उत्तराखंड राज्य के 75 जवान शामिल थे और इनमें से 31 शहीद जवान देहरादून क्षेत्र के थे। श्री जोशी ने गर्व से बताया कि उत्तराखंड प्रदेश के अब तक 1831 जवान शहीद हुए हैं, जिनमें से 1528 जवानों को वीरता पुरस्कार मिला है और 344 विशिष्ट सेवा पदक उत्तराखंड के वीर जवानों को मिले हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सैनिकों के कल्याण के लिए कार्य कर रही है, और राज्य सरकार द्वारा शहीद जवानों के परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने के कार्य के माध्यम से अब तक 37 लोगों को रोजगार मिल चुका है।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद  नरेश बंसल, विधायक खजान दास, विधायक श्रीमती सविता कपूर, दायित्वधारी श्रीमती विनोद उनियाल, सचिव सैनिक कल्याण दीपेंद्र चौधरी, मेजर जनरल सम्मी सबरवाल (से.नि), निदेशक सैनिक कल्याण ब्रिगेडियर अमृत लाल (से.नि), एमडी उपनल ब्रिगेडियर जे.एस.बिष्ट (से.नि), ब्रिगेडियर के.जी बहल (से.नि), जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, एसएसपी  अजय सिंह, अन्य सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक एवं शहीदों के परिवारजन उपस्थित थे।


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