
नई दिल्ली । पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर ‘कैश फॉर ट्रांसफर’ और गोपनीय सरकारी सूचनाओं के लीक होने के गंभीर आरोप सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है. भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी कांग्रेस ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में प्रस्तुत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के तत्काल इस्तीफे की मांग की है.
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि पंजाब में मान सरकार भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी है. उन्होंने दावा किया कि ईडी की जांच में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादले व पदस्थापना के लिए एक “रेट कार्ड” का खुलासा हुआ है. भाजपा के अनुसार, यह कथित नेटवर्क मुख्यमंत्री के अधिकारी (ओएसडी) राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़ा हुआ है.
पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि ईडी के हलफनामे से पता चलता है कि दलालों और बिचौलियों के व्हाट्सएप पर गोपनीय सरकारी दस्तावेज, अफसरों के तबादलों की ड्राफ्ट सूचियां और भविष्य की सरकारी नीतियां पाई गई हैं. उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के हितों के लिए बेहद गंभीर मुद्दा करार देते हुए सवाल उठाया कि संवेदनशील फाइलें और गोपनीय जानकारियां बिचौलियों तक कैसे पहुंच रही हैं.
बीजेपी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी द्वारा तीन बार पत्र भेजे जाने के बावजूद पंजाब पुलिस ने रिपोर्ट में नामित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की. गौरव भाटिया ने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री मान भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रहे हैं, और उन्होंने आप संयोजक अरविंद केजरीवाल तथा भगवंत मान से इस मामले का मुख्य सरगना कौन है, इसका जवाब देने को कहा.
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर पंजाब पुलिस की चुप्पी पर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील मामलों में एफआईआर दर्ज न होना चिंताजनक है और मुख्यमंत्री भगवंत मान का कार्यालय व परिवार भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है, इसलिए उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए. आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इन आरोपों ने राज्य के सियासी माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है.

