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कचरा निस्तारण परियोजना 2027 तक पूरी, रोजाना 4 हजार टन से अधिक कचरा प्रबंधित होगा

हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम-फरीदाबाद सीमा पर स्थित बांधवारी लैंडफिल के प्रबंधन, बॉयो-माइनिंग एवं कचरा निस्तारण का जिम्मा अब दो नई कंपनियों को सौंपा है। कचरा निस्तारण के लिए इन कंपनियों को 63-63 करोड़ रुपये का ठेका दिया है। पूर्व की इको ग्रीन कंपनी के साथ सरकार ने अपना एग्रीमेंट पहले ही रद्द कर लिया था। हालांकि कंपनी कोर्ट गई हुई है।

बादली से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने बुधवार को विधानसभा में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कूड़ा उठान के लिए ठेका लेने वाली कंपनियों ने काम नहीं किया। बांधवारी में कूड़े का पहाड़ बना हुआ है। इस वजह से वातावरण प्रदूषित हो रहा है और लोगों में बीमारियां फैल रही हैं। पूर्व के ठेके में धांधली के आरोप लगाते हुए उन्होंने इस मामले की जांच करवाने की मांग भी सदन में उठाई।

विपुल गोयल ने कहा कि 2017 में इको ग्रीन को 330 करोड़ रुपये में ठेका दिया गया था लेकिन कंपनी की परफोरमेंस सही नहीं थी। इसके चलते 14 अगस्त, 2024 में ठेका रद्द कर दिया गया। कंपनी इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट चली गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करके नये कांट्रेक्टर के लिए मंजूरी ली। कोर्ट की मंजूरी के बाद अब 14 लाख टन कूड़ा निस्तारण का ठेका दो कंपनियों को दिया गया है।

63-63 करोड़ रुपये के हिसाब से ये ठेका दिया है। एक कंपनी काम शुरू कर चुकी है और दूसरी कंपनी मार्च में काम शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियों 2027 तक अपना काम पूरा करेंगी। कुलदीप वत्स ने जब कूड़े के पहाड़ का मुद्दा उठाया तो विपुल गोयल ने कहा कि वर्तमान में वहां 16 लाख टन कूड़ा है। वहीं रोजाना चार हजार टन से अधिक कूड़ा और भी आ रहा है। ऐसे में इसे चरणबद्ध तरीके से निस्तारित किया जा रहा है।

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