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हरियाणा विधानसभा में आरटीई विवाद: सरकार इस साल योजना पूरी तरह लागू करने में फेल

हिसार। सरकार शिक्षा का अधिकार (आरटीई) योजना को पूरी तरह लागू करने में इस साल फेल साबित रही। इसकी गूंज विधानसभा सत्र में सुनने को मिली। 
 विपक्ष ने जहां गरीब वर्ग के 70 प्रतिशत बच्चों को उपरोक्त योजना से वंचित बताया तो सरकार इन तर्क पर सफाई देती रही।

मामला तूल पकड़ते देख विधानसभा के स्पीकर ने सरकार से आरटीई मामले में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। सरकार अब 2025-26 वर्ष में आरटीइ के हर पहलू जिसमें कितने विद्यार्थियों को लाभ मिला, कितने वंचित, किस कारण वंचित रह गए, निजी स्कूलों का तर्क क्या रहे, आवेदन कितने आए, कितने स्वीकार्य, कितने खारिज, किस बिंदु पर खारिज हुए, कितना जुर्माना लगा, नहीं भरा तो क्यों नहीं भरा सहित अन्य बिंदुओं पर रिपोर्ट पेश करेगी।

आदेश मिलते ही शिक्षा निदेशालय के अधिकारी उपरोक्त बिंदुओं पर आंकड़ा जुटाने में लग गए हैं। शिक्षा निदेशालय ने 1902 निजी स्कूलों से दाखिले करने की पावर छीन ली है, जिसमें उनके एमआइएस पोर्टल बंद कर दिए हैं। साथ ही आदेश दिए हैं कि सात दिन के अंदर वे तमाम दस्तावेज अपलोड कर दें। अन्यथा नए शैक्षणिक सत्र में प्रदेश के 1902 निजी स्कूल किसी भी विद्यार्थी का दाखिल नहीं कर पाएंगे।

निजी स्कूलों ने की थी मनमानी

पूरा साल आरटीई मामले में निजी स्कूलों ने मनमानी की। पहले फेज में प्रदेश के 10,700 स्कूलों में से 2664 ने 8070 आवेदन खारिज किए जिसमें किलोमीटर और आय प्रमाण पत्र की कमियां बताई गई। जिसके कारण प्रदेश के 70 प्रतिशत विद्यार्थियों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिला नहीं मिला।

बता दें कि पहले फेज में प्रदेश के 10,700 निजी स्कूलों में गरीब परिवारों के 11,803 विद्यार्थियों को दाखिला मिलना था। तीन बिंदुओं पर निजी स्कूलों ने निकाली खामियां निजी स्कूलों ने किलोमीटर-रिहायशी व वार्षिक आय प्रमाण पत्र में खामियां निकाली। जिनमें निजी स्कूलों ने सर्वाधिक किलोमीटर मानक पर खामियां निकाली थी।

जवाब में निदेशालय ने घर से तीन किलोमीटर दायरे में आने वाले निजी स्कूलों में दाखिले के लिए विद्यार्थियों को छूट दी। जबकि 60 प्रतिशत निजी स्कूल प्रबंधकों ने इस नियम का पालन करने से इन्कार कर दिया।

सात दिन में निदेशालय को देना होगा जवाब

विधानसभा सत्र में आरटीई का मामला गूंजते ही शिक्षा निदेशालय ने पत्राचार कर 1902 निजी स्कूलों को आदेश दिए हैं कि वे आरटीई को लेकर अपनी तमाम रिपोर्ट दें। साथ ही समस्त बिंदुओं पर लिखित में जवाब पेश करे। यह जवाब सात दिन के अंदर निदेशालय में देना होगा। इसके लिए पोर्टल खोल दिया है।

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