खनन अधिकारी प्रवर्तन दल व खनन ठेकेदार में आखिर क्यों हुई मारपीट

-एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी , महीना वसूली की बात आई सामने
बलराम मौर्य/ बालजी हिन्दी दैनिक
अयोध्या। खनन विभाग की जांच दल एवं खनन ठेकेदार के बीच हुए मारपीट की घटना को राजनीतिक तूल पकड़ाया जा रहा है। जबकि मामले की सही ढंग से जांच कराई जाए तो सत्यता स्वयं सामने आ जाएगी कि आखिरकार दोषी कौन है? शनिवार की शाम को कैंट थाना क्षेत्र में खनन अधिकारी प्रवर्तन दल अनंत देव वर्मा सोहावल तहसील के ग्राम फतेहपुर सरैया मांझा में बालू घाट पर जांच करने पहुंच गए। जिसका लाइसेंस 5 मार्च 2025 से 4 मार्च 2030 तक के लिए वैध है। क्षेत्रीय परिवर्तन अधिकारी का कहना है कि ट्रक में लदे बालू जितने घन मीटर के लिए स्वीकृत था। उससे अधिक लगभग 16 घन मीटर बालू लोड पाया गया। इसी चालान को लेकर मेरे साथ उनके लोगों ने अभद्रता की। वहीं दूसरी ओर राकेश जायसवाल का आरोप है कि मेरी लोकप्रियता से कुछ राजनीतिक विपक्षी घबराए हुए हैं। खनन अधिकारी से केवल तू तू मै मै हुई है, पिटाई की बात निराधार है। पूर्व में खनन अधिकारी रहे राघवेंद्र सिंह का अलग-अलग लोगों के साथ बालू घाट, जमीन की खरीद फरोख्त आदि जैसे मामलों में हिस्सेदारी है। वर्तमान में जांच दल अधिकारी उनका सगा रिश्तेदार हैं। इनके द्वारा अयोध्या कोतवाली अंतर्गत दर्शन नगर पुलिस चौकी क्षेत्र में रामपुर हलवारा बालू घाट में पूर्व खनन अधिकारी पार्टनर है। तथा अन्य जगहों पर चल रहे बालू घाट शिकायत के बावजूद भी छापेमारी नहीं की जाती है। यहां पर ठेकेदारों द्वारा खनन अधिकारी से मिली भगत कर जिस बालू घाट के लिए पट्टा आवंटित है। वहां पर खुदाई ना करके अन्यत्र जगह सैकड़ो बीघा में खनन माफियाओं द्वारा कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। शासन से मांग करते हैं कि ऐसे अधिकारियों की आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच सक्षम एजेंसी से कराई जाए।





