अयोध्याउत्तर प्रदेश

बाबा लंगड़ दास स्मारक मेला हुआ संपन्न, विविध कार्यक्रमों से गूंजा खजुरीपुर

स्वाधीनता दौड़ में नरेंद्र रहे प्रथम, विजेताओं व सेनानियों को किया गया सम्मानित

सपा नेत्री रोली यादव ने युवाओं से शहीदों के आदर्श अपनाने का किया आह्वान

बाबा लंगड़ दास स्मारक मेला हुआ संपन्न, हुए विविध कार्यक्रम

संदीप विक्रम सिंह /बालजी दैनिक
जाना बाजार,अयोध्या। तिरंगे के साथ 3 किलोमीटर आयोजित स्वाधीनता दौड़ में नरेंद्र ने बाजी मारते हुए प्रथम विजेता घोषित हुए। वहीं अन्य कार्यक्रमों के विजेताओं को पुरस्कृत व सेनानियों बुजुर्गों को मुख्य अतिथि सपा नेत्री रोली यादव द्वारा सम्मानित किया गया। उन्होंने संबोधित करते कहां की स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के नायकों को युवा रोल मॉडल के रूप में अपनाए और शहीदों के विचारों को आत्मसात करें। शांति सौहार्द पूर्वक स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के प्रणेता बाबा लंगड़दास की समाधि पर लगने वाला मेला संपन्न हुआ। थाना क्षेत्र हैदरगंज की ग्राम पंचायत जाना बाजार के खजुरीपुर ककरिया स्थित लंगड़दास के समाधि स्थल के मेले की शुरुआत बाबा फुल्लरदास बाजार स्थित समाधि स्थल से तिरंगे के साथ 3 किलोमीटर लंबी दौड़ मे शामिल 41 धावकों को प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि रहे क्षेत्रीय विधायक अभय सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। धावक जाना बाजार, देवलहा, लौटन लाल का पूरा, बूड़ापुर, बढ़ैया, खजुरीपुर होते हुए ककरिया स्थित बाबा की समाधि मेला मैदान पहुंचे। अध्यक्षता चिंतामणि सिंह व संचालन अतुल यादव ने किया। उद्घाटन करते हुए संयोजक शेर बहादुर शेर ने ग्राम पंचायत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, सैनिकों सहित अन्य लोगों के ऐतिहासिकता के इतिहास को विस्तृत रूप से बताते हुए परिचय दिया। मुख्य अतिथि के अलावा वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेम कुमार वर्मा, डॉ मनोज यादव, जितेंद्र वर्मा, भास्कर तिवारी, हरीराम भारती, जेपी सिंह, अनुराग वर्मा ने संबोधित किया। दौड़ के प्रथम विजेता सहित द्वितीय विजेता सचिन यादव, तृतीय शनि निषाद सहित 10 लोगों को भी सांत्वना पुरस्कार तो वही रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम पल्लवी सिंह, द्वितीय बिट्टू सिंह, तृतीय अनामिका रही। इस अवसर पर शिवपाल सिंह, पवन सिंह, राम अंजोर पाल, शिवम शर्मा, आकाश सिंह, राजाराम पाल, सनी सिंह, कृष्णा सिंह, दयाशंकर सिंह, चंद्रपाल, शंभू सिंह, युवराज यादव, विवेक सिंह आदि रहे। अतिथियों ने अमूल्य रत्न पत्रिका का प्रकाशन के साथ यादगार स्थल के निर्माण की आधार शिला भी रखी गयी।

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