
रांची: स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने आज गुरुवार को नेपाल हाउस मंत्रालय में दो महत्वपूर्ण बैठक कर कई अहम निर्देश दिए. जिसमें रिनपास में 20 बेडेड इंडोर बाल एवं किशोर चिकित्सा इकाई स्थापित करने और राज्य के मेडिकल कॉलेजों में यूजी-पीजी सीटें बढ़ाने के साथ-साथ फैकल्टी और स्टाफ पुनर्गठन का निर्देश शामिल है.
रिनपास को लेकर हुई बैठक में अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, रिनपास की निदेशक डॉ. जयति सिमलाई, सहायक निदेशक मिथिलेश चौधरी सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे. बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव ने रिनपास में वर्तमान 100 बेडेड साईकेट्रिक रेजिडेंशियल शेल्टर होम की स्थिति और उपलब्ध क्षमता की जानकारी ली. उन्होंने संस्थान में उपलब्ध संसाधनों और मौजूदा व्यवस्थाओं का आकलन करते हुए आवश्यक सुधार एवं विस्तार की दिशा में कार्य करने का निर्देश दिया.
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था को देखते हुए रिनपास में डीपीएन कोर्स को दोबारा शुरू करने की जरूरत है. उन्होंने इसके लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने और जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. इसके साथ साइकाइट्रिक नर्सिंग क्लासेस चलाने हेतु सारी व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया.
अपर मुख्य सचिव ने रिनपास में एमडी साईकेट्रिक का कोर्स भी दोबारा शुरू करने की दिशा में भी आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश निदेशक को दिया. साथ ही कहा कि इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने सहित सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करायी जाएगी.
इस बैठक में रिनपास में स्वीकृत एवं कार्यरत पदों कीसमीक्षा करने का भी निर्देश दिया गया. अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी पदों का एक बार पुनर्मूल्यांकन कर आवश्यकता के अनुसार रिस्ट्रक्चरिंग की जाए,जिस क्षेत्र में जिस प्रकार के पदों की आवश्यकता है, उसका आकलन कर प्रस्ताव तैयार किया जाए.
इस दौरान उन्होंने बाल एवं जेरिएट्रिक क्षेत्र में सुपर स्पेशलिस्ट की पढ़ाई शुरू करने पर जोर दिया. अपर मुख्य सचिव ने कहा कि संस्थान में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा और उपचार की सुविधाओं का विस्तार होने से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी. साथ ही रिनपास की पुरानी प्रतिष्ठा और बेहतर कार्यप्रणाली को फिर से स्थापित करने की दिशा में भी काम किया जाए.
मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी यूजी-पीजी सीटें, फैकल्टी और स्टाफ का होगा पुनर्गठन
सचिव अजय कुमार सिंह ने दूसरी समीक्षा बैठक में राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों से एक सप्ताह में वहां की पूरी रिपोर्ट मांगी है. राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में यूजी और पीजी की सीटें बढ़ाने की तैयारी के तहत सीटों में वृद्धि के अनुरूप फैकल्टी, डॉक्टर, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के पदों का पुनर्गठन करने का फैसला लिया गया है. इसके लिए सभी मेडिकल कॉलेजों को वर्तमान मानव संसाधन और भविष्य की जरूरतों का आकलन कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है.
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों की हुई इस समीक्षा बैठक में विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, मेडिकल एजुकेशन निदेशक डॉ. पी. भट्टाचार्य सहित राजकीय मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य/अधीक्षक शामिल हुए.
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के लिए सिविल वर्क के साथ पर्याप्त ह्यूमन रिसोर्स जरूरी है. इसलिए प्रत्येक संस्थान में डॉक्टर, फैकल्टी, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ की वर्तमान स्थिति तथा भविष्य की आवश्यकता का विस्तृत आकलन किया जाए.उन्होंने यूजी और पीजी सीट बढ़ाने की दिशा में कार्ययोजना तैयार करने को कहा.
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि फैकल्टी की कमी होने पर आवश्यकता के अनुसार संविदा पर प्रोफेसरों की नियुक्ति की जा सकती है. ऐसे में जरूरत पड़ने पर सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं लेने और दूसरे राज्यों व शहरों से भी योग्य प्रोफेसरों को बुलाने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया. इसका पूरे देश में व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश उन्होंने दिया ताकि अन्य राज्यों से योग्य प्राध्यापक, सह प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक की सेवाएं ली जा सके.
उन्होंने सभी मेडिकल कॉलेजों में अगले तीन वर्षों की कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया, एसएनएमएमसीएच धनबाद की ओर से बताया गया कि वर्ष 2030 तक की योजना तैयार की गई है. जिसमें यूजी की 250 और पीजी की 200 सीट बढ़ाने का प्रस्तावित लक्ष्य शामिल है,जिसके आधार पर सभी शैक्षणिक और गैस शैक्षणिक पदों को रिस्ट्रक्चर करने का निर्देश दिया गया.
बैठक में दुमका, हजारीबाग, पलामू समेत अन्य मेडिकल कॉलेजों की भी समीक्षा की गई,बैठक में अधिकारियों को यूजी में 200 और पीजी में 150 सीट तक बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करने तथा इसके अनुरूप फैकल्टी, पैरामेडिकल स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था का आकलन करने को कहा गया.
अपर मुख्य सचिव ने बोकारो और चाईबासा में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की प्रगति की भी जानकारी ली. इस दौरान उन्हें बताया गया कि दोनों मेडिकल कॉलेजों के भवन अगले वर्ष तक तैयार होने की संभावना है, उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक फैकल्टी और अन्य संसाधन समय पर उपलब्ध हो जाते हैं तथा निर्धारित मानक पूरे होते हैं, तो अगले वर्ष से वहां पढ़ाई शुरू करने की दिशा में प्रयास किया जा सकता है.



