उत्तर प्रदेशप्रयागराज

सुर-लय और नृत्य की झांकी से झिलमिलाया शिल्प मेला, लोक संस्कृति के रंगों में रंगा शिल्प हाट

प्रयागराज – 09-10-2025
बीके यादव/बालजी दैनिक

भारत की लोक-संस्कृति, रंग, ताल और परंपरा का अनुपम झलक गुरुवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित 12 दिवसीय दीपावली शिल्प मेले में देखने को मिला। सांस्कृतिक केंद्र के शिल्प हाट में चल रहे इस सांस्कृतिक उत्सव में लोकगीतों और नृत्यों की मनमोहक अभिव्यक्ति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इलाहाबाद संग्रहालय के निदेशक राजेश प्रसाद का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर केद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने किया।
रस घोल गए बिरहा के भाव- प्रियंका माधुरी ने बिरहा के भाव में बनवा में राम गइले सिया के हरण भाई ले एवं मेला गीत बोहरिया परो मेलवा में सइया न भेंटाय की तर्ज पर राम वन गमन की पीड़ा को सुनाकर लोकजीवन की खिड़की खोल दी तो आयना बोस ने लोकगीत ‘ धरती पर आया स्वाग उतर कर ऐसा त्योहार दीवाली रौशनी वाली ये सब त्योहार की रानी, जगमग दीप जले और नई झुलनी के छइया बलम दोपहरिया दिलाय दा हो.’ सहित कई गीत गाकर लोक जीवन के अनूठे दृश्य पेश किए।

वहीं, आयना बोस ने “धरती पर आया स्वर्ग उतर कर ऐसा त्योहार दीवाली रौशनी वाली…” और “नई झुलनी के छइया बलम दोपहरिया दिलाय दा हो” जैसे गीतों से दीपावली की लोक-आभा को सुरों में सजाया। उनके गीतों ने श्रोताओं को परंपराओं की जड़ों तक पहुंचा दिया।
ब्रज की भक्ति में रमा मयूर नृत्य- मथुरा के मुरारी तिवारी एवं दल ने भक्ति और सौंदर्य का संगम प्रस्तुत करते हुए मयूर नृत्य से राधा-कृष्ण की लीलाओं को साकार कर दिया। मोरपंख से सजे कलाकारों की लयबद्ध भंगिमाओं ने वातावरण को भक्ति-रस से सराबोर कर दिया।
करमा नृत्य ने बांधा समां- कार्यक्रम का समापन कतवारू राम एवं दल द्वारा प्रस्तुत करमा नृत्य से हुआ। उनकी तालबद्ध प्रस्तुति और उत्सवधर्मी ऊर्जा ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। मंच का संचालन रूचि दुबे ने किया। इस अवसर पर काफी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
मेले में दूसरे दिन बढी रौनक -मेले के दूसरे दिन शिल्प हाट में रौनक और बढ़ गई। देश के 13 राज्यों से आए शिल्पकारों ने अपने-अपने स्टॉल सजाए, जिन पर हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुओं की खरीददारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी रही

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