सिसेंडी गांव की जर्जर सड़क बनी जानलेवा, ग्रामीण और व्यापारी परेशान सरकार के गड्ढा मुक्त अभियान की खुल रही पोल

भाजपा विधायक अमरेश रावत दिखा रहे उदासीनता, सरकार के गड्ढा मुक्त अभियान की खुल रही पोल………
मोहनलालगंज। राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र अंतर्गत सिसेंडी गांव की हालत दिनों-दिन बदतर होती जा रही है। खासकर सिसेंडी मौरावा रोड से बड़े शिवाला मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। सड़क पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि राहगीरों की जान पर बन आई है। बरसात के मौसम में ये गड्ढे पानी से लबालब भर जाते हैं, जिससे राहगीरों का निकलना मुश्किल ही नहीं, खतरनाक हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत तो दूर, इसे देखने तक कोई जनप्रतिनिधि नहीं आया। करीब सात साल पहले समाजवादी पार्टी की पूर्व विधायक चंद्रा रावत ने इस सड़क का निर्माण कराया था, लेकिन अब इसकी हालत बेहद खराब है और मरम्मत की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा।
भाजपा विधायक अमरेश रावत पर भी उठे सवाल……..
स्थानीय भाजपा विधायक अमरेश रावत पर भी लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार विधायक से मिलकर सड़क की दुर्दशा की शिकायत की, लेकिन विधायक ने न तो कोई कार्रवाई की और न ही खुद कभी सड़क देखने आए। लोगों का कहना है कि भाजपा सरकार की योजनाओं की हवा निकल चुकी है और क्षेत्रीय विधायक खुद जनता की समस्याओं से बेखबर हैं।
व्यापारियों में भी भारी आक्रोश…….
सिसेंडी गांव में मौजूद कपड़ा मार्केट अब सड़क की बदहाली के चलते मंदी की कगार पर है। व्यापार मंडल के सदस्यों ने बताया कि खराब सड़क की वजह से ग्राहक कम आने लगे हैं। कई बार राहगीर गिरकर चोटिल हो चुके हैं। व्यापारी बेहद नाराज हैं और प्रशासन की उदासीनता को लेकर आक्रोशित हैं।
गड्ढा मुक्त सड़क अभियान को पलीता लगा रहे अधिकारी…...
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां पूरे प्रदेश में गड्ढा मुक्त सड़क अभियान को लेकर गंभीर प्रयास कर रहे हैं, वहीं अधिकारी उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार अफसर इस सड़क से गुजर चुके हैं, लेकिन उन्होंने इसे देखना तक मुनासिब नहीं समझा।यह स्थिति साफ तौर पर दर्शाती है कि भाजपा सरकार के वादे और ज़मीनी हकीकत में कितना फर्क है। जनता त्रस्त है, लेकिन शासन-प्रशासन में बैठे लोग मस्त हैं। सिसेंडी गांव की यह सड़क न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रही है, बल्कि यह भी साफ कर रही है कि जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं से कितने दूर हो चुके हैं।





