रंजीत पांचाले को जिलाधिकारी ने दिया राधेश्याम स्मृति सम्मान

बरेली । पंडित राधेश्याम कथावाचक पर हुई बौद्धिक गोष्ठी में वक्ताओं ने राधे श्याम कथावाचक के रामायण एवं नाटक लेखन के विभिन्न पक्षों और उनकी विशेषताओं पर अपना अपना पक्ष रखा। साहित्यकार एवं इतिहासविद रणजीत पांचाले को पंडित राधेश्याम कथावाचक स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया।
रोटरी भवन में पांचाल सांस्कृतिक परिषद की ओर से पंडित राधे श्याम कथावाचक की 135 वी जयंती पर बौद्धिक गोष्ठी में मुख्य अतिथि डी एम अविनाश सिंह ने कहा कि आज की नई पीढ़ी को भारतीय सभ्यता, संस्कृति से जोड़ने के लिए पंडित राधेश्याम कथावाचक के श्रेष्ठ मूल्यों पर आधारित साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पंडित जी की मूर्ति तैयार हो गई है । साथ ही नव निर्मित आडिटोरियम को पंडित राधे श्याम जी स्मृति भवन के नाम पर कराया जाएगा। पंडित राधे श्याम कथावाचक की पौत्री शारदा भार्गव ने स्कूलों में पंडित जी की बात बच्चों को बताने की आज जरूरत है। उन्होंने कहा कि पंडित राधेश्याम के महान व्यक्तित्व और उत्कृष्ट कृतित्व से नई पीढ़ी को परिचित कराने के लिए जनपद के स्कूलों में उनकी जयंती भी 23 तारीख को मनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा आज हम नहीं पूरा बरेली राधेश्याम जी का परिवार है। कथावाचक के प्रपौत्र संजय शर्मा ने उनकी राधेश्याम रामायण के प्रसंग सुनाए। कार्यक्रम के दौरान साहित्यकार हरिशंकर शर्मा की किताब ‘पं. राधेश्याम कथावाचक के एकांकी’ का विमोचन किया गया। निर्भय सक्सेना ने जिलाधिकारी अविनाश सिंह एवं अन्य की “कलम बरेली की 5” अंक भेट किया
पांचाल सांस्कृतिक परिषद की गोष्ठी में अध्यक्षीय उद्बोधन में रुहेलखंड विश्वविद्यालय में राधेश्याम शोध पीठ की समन्वयक डॉ. अनीता त्यागी ने कहा कि यह शोधपीठ कथावाचक के साहित्य पर प्रत्येक वर्ष 10 शोध- पत्र तैयार कराने का प्रयास करेगी। इसके अतिरिक्त जितने भी लोग उनसे परिचित हैं, उनके संस्मरणों को संकलन किया जाएगा।
इतिहासविद डॉ. अनिल मिश्रा ने कहा कि राधेश्याम रामायण में लोक तत्व समाहित हैं। उसमें माधुर्य और सरसता है, जिसके कारण वह जन-जन को अपनी ओर आकर्षित करती है। साहित्यकार रणजीत पांचाले ने कहा कि पंडित जी
सनातन संस्कृति के उन्नायक थे। उन्होंने अपने संपूर्ण लेखन में किसी भी संप्रदाय के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं लिखा। वह समाज को विभाजित करने वाली प्रवृत्तियों के विरोधी थे। उन्होंने अपनी रचनाओं में देश की एकता पर विशेष बल
दिया था।
संगीत अकादमी के सदस्य डॉ. सुभाष दीक्षित, साहित्यकार आचार्य देवेंद्र देव, हरिशंकर शर्मा, इंद्रदेव त्रिवेदी, मोहन चंद्र पांडे, नवगीतकार रमेश गौतम, डॉ. नितिन सेठी, डॉ सौरभ अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल ने अनेक उदाहरण देकर पंडित जी के सामाजिक सरोकारों और उनकी काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डाला। संचालन साहित्यकार डॉ. अवनीश यादव ने किया। सेवानिवृत्त पी सी एस अधिकारी रामसेवक द्विवेदी एवं अतुल मिश्रा ने सभी का आभार व्यक्त किया। विक्रम भार्गव, सुरेंद्र बीनू सिन्हा, निर्भय सक्सेना, डॉ पंकज शर्मा, विपुल सिंह, देवेंद्र उपाध्याय, सौरभ तिवारी, पूजा भार्गव, भारती सिंह, उमेश गुप्ता, प्रमोद मिश्रा आदि कार्यक्रम में मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान साहित्यकार हरिशंकर शर्मा की किताब ‘पं. राधेश्याम कथावाचक के एकांकी’ का विमोचन भी किया गया।





