फेडरेशन ने उठाई जीएसटी हटाने और विज्ञापन में भेदभाव खत्म करने की मांग
यूपी में छोटे और मध्यम अखबारों पर गहराया संकट

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन, नई दिल्ली की उत्तर प्रदेश राज्य शाखा की बैठक लखनऊ में आयोजित हुई। बैठक में अखबार उद्योग, विशेषकर छोटे और मध्यम समाचार पत्रों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई।
प्रेस परिषद के गठन और जीएसटी पर सवाल
बैठक में सदस्यों ने चिंता जताई कि भारतीय प्रेस परिषद (PCI) का कार्यकाल समाप्त हुए एक साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन 15वीं परिषद का गठन अभी तक नहीं हुआ है। इसके साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय के कॉमन कॉज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2015) निर्णय के अनुपालन की मांग भी दोहराई गई।
स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन ने कहा कि प्रेस परिषद की 12वीं परिषद ने सर्वसम्मति से छोटे और मध्यम समाचार पत्रों के लिए न्यूजप्रिंट पर जीएसटी हटाने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन जीएसटी काउंसिल ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। फेडरेशन ने भारत सरकार से इस प्रस्ताव को तत्काल लागू करने की मांग की है।
विज्ञापन नीति में भेदभाव का आरोप
सदस्यों ने भारत सरकार के सीबीसी (CBC) और उत्तर प्रदेश सरकार के यूपीआईडी (UPID) द्वारा विज्ञापन वितरण में छोटे और मध्यम समाचार पत्रों के साथ किए जा रहे भेदभाव पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। उनका आरोप है कि सरकारी विज्ञापनों का वितरण निष्पक्ष तरीके से नहीं किया जा रहा है, जिससे छोटे अखबारों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
संगठन का विस्तार और पत्रकारों की सुरक्षा
बैठक में उत्तर प्रदेश शाखा को छह जोनों में विभाजित करने का निर्णय लिया गया, ताकि राज्य भर में स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन के काम को बेहतर ढंग से समन्वित किया जा सके। इसके तहत, जोन कॉर्डिनेटर नियुक्त किए गए:
- जोन 1: अशोक नवरत्न (लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, आगरा)
- जोन 2: नीरज गुप्ता (मुरादाबाद, बरेली)
- जोन 3: मुकेश गोयल (मेरठ, सहारनपुर)
- जोन 4: अनिल त्रिपाठी (वाराणसी, प्रयागराज)
- जोन 5: परवेज आलम (बांदा, झांसी, मिर्जापुर)
- जोन 6: शोएब अहमद (आजमगढ़, गोरखपुर, देवीपाटन, अयोध्या, बस्ती)
इसके अलावा, पत्रकारों और संपादकों के लिए सामूहिक बीमा, पहचान पत्र, आवास सुविधा और पत्रकारों पर अभियोग दर्ज करने से पहले उच्च स्तर पर जांच कराने की मांग भी की गई, ताकि उन्हें अनावश्यक उत्पीड़न से बचाया जा सके।
बैठक में यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश सरकार को प्रेस परिषद की विज्ञापन उप-समिति की रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, और प्रयागराज उच्च न्यायालय में लंबित वर्ष 2025 की याचिका की शीघ्र सुनवाई से छोटे और मध्यम समाचार पत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।
स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स फेडरेशन की बैठक में प्रमुख रूप से अशोक कुमार नवरत्न, अनिल कुमार त्रिपाठी, परवेज आलम, अनिल कुमार सिंह, अमजद हुसैन, केपी मिश्रा, तीरथ सिंह, अश्वनी कुमार गुप्ता, पंकज शर्मा, मनीष श्रीवास्तव, दीपक तिवारी, अर्जुन द्विवेदी, बालाजी प्रजापति, विजय राज साहू, हर्षित त्रिपाठी, पंकज सिंघल आदि उपस्थित रहे।
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