
चंडीगढ़: पंजाब में विधिक सहायता बचाव वकील योजना (LADC) के विरोध में पिछले 27 दिनों से जारी वकीलों की हड़ताल पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी मांग को मनवाने के लिए न्यायालयों का कामकाज बाधित करना और न्यायिक व्यवस्था पर दबाव बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति कानून के शासन और आम नागरिकों के न्याय पाने के अधिकार के खिलाफ है।
यह टिप्पणी जिला अदालतों में चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने की। अदालत ने कहा कि पिछले 27 दिनों से जिला अदालतों में न्यायिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे हजारों मामलों की सुनवाई लंबित हो गई है और आम लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी सरकारी योजना या उसके क्रियान्वयन को लेकर कोई वास्तविक शिकायत है तो उसके समाधान के लिए कानूनी और प्रशासनिक मंच उपलब्ध हैं। लेकिन अदालतों का कामकाज ठप कर सरकार और न्यायपालिका पर दबाव बनाने का प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो यह मान लिया गया हो कि लगातार दबाव बनाकर अंततः पूरी व्यवस्था झुक जाएगी, जबकि न्यायपालिका किसी भी प्रकार के दबाव में निर्णय नहीं लेती। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। साथ ही यह भी सवाल उठाया कि अदालतों का काम रोककर वकील समाज आम जनता के बीच आखिर क्या संदेश देना चाहता है।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अरविंद सेठ ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की एलएडीसी योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद आरोपियों को संस्थागत एवं गुणवत्तापूर्ण कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत पूर्णकालिक विधिक सहायता बचाव वकीलों की नियुक्ति की जाती है, ताकि पात्र व्यक्तियों को समय पर कानूनी सहायता मिल सके।
दूसरी ओर, पंजाब के विभिन्न बार एसोसिएशनों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले से पैनल में कार्यरत वकीलों के रोजगार और पेशेवर अवसर प्रभावित हो रहे हैं। इसी विरोध में प्रदेश के कई बार संघ पिछले 27 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हाईकोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और न्यायिक व्यवस्था को सामान्य करने के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
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