ज्ञान परंपरा हमें वेदों एवं मनीषीयों से हुई प्राप्त – प्रो. अम्बिका प्रसाद

भारतीय ज्ञान परंपरा से ही समृद्ध होगा भारत – प्रो. आशुतोष सिन्हा
बलराम मौर्य/ बालजी हिन्दी दैनिक
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वाविद्यालय के अर्थशास्त्र एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ” द इंडियन परस्पेक्टिव ऑफ़ इकोनॉमिक्स: एनेलिटिक्स एंड रिलेवेंस” विषय पर कुलपति कर्नल डॉ. बिजेंद्र सिंह के निर्देशन में विशिष्ट व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुर्नवास विश्वविद्यालय, लखनऊ अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अम्बिका प्रसाद तिवारी रहे।
मुख्य अतिथि प्रो. अम्बिका प्रसाद तिवारी ने कहा कि पूंजीवाद एवं समाजवाद दोनों ही केवल भौतिकता को ही प्रधानता देते हैं। इसी कारण वे लक्ष्य को प्राप्त करने में असफल रहे हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा भौतिकता के साथ अध्यात्म को जोड़ने की बात करती है। यही विचारधारा प्रसिद्ध अर्थशास्त्री पैरेटो की इष्टतम की अवधारणा को सिद्ध करती है । प्रो. तिवारी ने लोक-परलोक, पुनर्जन्म एवं ‘परा’ की अवधारणा को भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न अंग बताया। श्रीरामचरितमानस की चौपाई को उद्धरित करते हुए उन्होंने बताया की सुमति से प्राप्त विकास ही हमें समृद्ध बनाएगा और कुमति हमें विनाश की ओर ले जाएगी। भारतीय ज्ञान धारा हमें संतोष एवं तृप्ति की ओर ले जाती हैं। वहीं पाश्चात्य विचार हमें टकराव एवं संघर्ष की तरफ ले जाते हैं। अर्थशास्त्र के सिद्धांत की भारतीय ज्ञान परंपरा हमें वेदों एवं संतो- मनीषीयों से प्राप्त हुई है। उसमे नैतिकता का महत्वपूर्ण स्थान है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. आशुतोष सिन्हा ने अर्थशास्त्र के भारतीय दृष्टिकोण की विवेचना में बताया कि राष्ट्र की आर्थिक नीति को भारतीय ज्ञान परंपरा के सिद्धांतो के आधार पर निर्मित करके ही हम लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह हम विकसित एवं समृद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं। जहाँ हर भारतीय संपन्न एवं सबल होगा। धर्मानुसार आचरण से यही आर्थिक सबलता जीवन के विभिन्न आयामों में पूर्णता और सफलता प्राप्त करने में सहायक होगी। विभागाध्यक्ष प्रो. आशुतोष सिन्हा ने मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ देकर किया। प्रो.मृदुला मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर प्रो. विनोद कुमार श्रीवास्तव, प्रो. प्रिया कुमारी, डॉ. अलका श्रीवास्तव, विजय शुक्ला, कुशाग्र पाण्डेय एवं बड़ी संख्या में छात्र एवं छात्राओं ने प्रतिभाग किया।





