
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को विधायकों ने हंगामे में काफी समय बर्बाद कर दिया। नतीजतन विधायी कार्यों को निपटाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण को सदन की कार्यवाही बार-बार कभी एक घंटे तो कभी आधा घंटे के लिए बढ़ानी पड़ी।
रात करीब सवा नौ बजे तक सदन चला। वहीं, आम बजट में 15 विभागों मिली राशि कम पड़ गई है। इन अतिरिक्त खर्चों की पूर्ति के सदन ने 7255 करोड़ रुपये की अनुपूरक मांगों को स्वीकृति दी है। इनमें 5440 करोड़ का राजस्व खर्च और 1815 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च शामिल है।
ऊर्जा, उद्योग एवं वाणिज्य, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और सिंचाई विभागों के लिए 1441.54 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिनमें 1341.53 करोड़ रुपये राजस्व और 100. करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए हैं।
शहरी विकास, नगर निकाय, पंचायत, ग्रामीण विकास और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी से जुड़े विभागों के लिए कुल 1797 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिनमें 1356.74 करोड़ रुपये राजस्व और 440.34 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए हैं। वित्त विभाग को 1005 करोड़ रुपये मिलेंगे।
सहकारिता, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों से जुड़े विभागों के लिए 1104.25 करोड़ रुपये मिले हैं। इनमें 904.25 करोड़ रुपये राजस्व और 200 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए प्रस्तावित हैं। गृह, जेल और न्याय प्रशासन के लिए कुल 665.18 करोड़ रुपये मिलेंगे, जिसमें 323.67 करोड़ रुपये राजस्व और 341.51 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए हैं।
लोक निर्माण, परिवहन और नागरिक विमानन के लिए 882.18 करोड़ रुपये, कृषि एवं संबंधित विभागों के लिए 110.48 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य के लिए 176.57 करोड़ रुपये और शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास के लिए 40.53 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। खेल, विरासत और पर्यटन के लिए 10 करोड़ रुपये, श्रम एवं कौशल विकास के लिए नौ करोड़ और सामाजिक न्याय एवं कल्याण विभाग के लिए 12.86 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

